Bettiah Liquor News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। बेतिया के नरकटियागंज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सप्तक्रांति एक्सप्रेस ट्रेन की पैंट्री कार से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की गई है। इस कार्रवाई के दौरान पैंट्री मैनेजर सहित कुल चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे शराब तस्करों के नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रेलवे सुरक्षा बल और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह विशेष जांच अभियान चलाया था। गाड़ी संख्या 12558 सप्तक्रांति एक्सप्रेस में तलाशी के दौरान पैंट्री कार में छिपाई गई अवैध शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई। बरामद की गई शराब की कुल मात्रा 42.165 लीटर बताई जा रही है, जिसे 60 बोतलों में पैक किया गया था।
शराबबंदी के बावजूद ट्रेन में तस्करी का नेटवर्क
बिहार में शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन ट्रेनों के माध्यम से शराब की तस्करी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह घटना दर्शाती है कि तस्करों ने शराब पहुंचाने के लिए नए-नए तरीके अपना लिए हैं और रेलवे के कर्मचारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इस प्रकार की घटनाओं से राज्य में शराबबंदी के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठते हैं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह शराब संभवतः राज्य के बाहर से लाई जा रही थी और इसका उद्देश्य बिहार के विभिन्न शहरों में इसकी आपूर्ति करना था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, रेलवे सुरक्षा एजेंसियां और उत्पाद विभाग मिलकर एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने में जुटे हैं। प्रारंभिक जांच में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
विशेष अभियान में पकड़ी गई बड़ी खेप
नरकटियागंज स्टेशन पर गुरुवार को चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान, टीम ने सबसे पहले पैंट्री कार मैनेजर संतोष शाह के केबिन की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान संतोष शाह के कब्जे से 750 एमएल की 31 बोतलें विदेशी शराब मिलीं। यह मात्रा अकेले एक व्यक्ति के पास से मिलना बेहद चौंकाने वाला था।
इसके बाद पैंट्री मैन राज कुमार की भी तलाशी ली गई, जिसके पास से 750 एमएल की 24 बोतलें विदेशी शराब बरामद हुईं। इन बरामदगियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पैंट्री कार में शराब तस्करी का एक सुनियोजित रैकेट चल रहा था। टीम ने अपनी जांच जारी रखी और अन्य कर्मचारियों पर भी नजर रखी।
जांच के दायरे में आए दो सफाई कर्मियों, गोविंद कुमार और रिकी कुमार, के पास से भी शराब की बोतलें मिलीं। गोविंद कुमार के कब्जे से 180 एमएल की दो बोतलें और रिकी कुमार के पास से 180 एमएल की तीन बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं। इस प्रकार कुल 60 बोतलें जब्त की गईं, जिनकी कुल मात्रा 42.165 लीटर थी।
सभी गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी गंभीरता से जांच की जाएगी।
रेलवे कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने रेलवे के भीतर शराब तस्करी में कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह बरामद शराब कहां से मंगाई गई थी और इसे किन ठिकानों तक पहुंचाया जाना था। क्या इसके पीछे कोई बड़ा आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा है, यह भी जांच का विषय है।
रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी इस पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह केवल एक छोटी घटना नहीं हो सकती, बल्कि यह एक बड़े तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकता है। पुलिस इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह घटना एक बार फिर से इस बात की पुष्टि करती है कि बिहार में शराबबंदी को लागू करना कितना चुनौतीपूर्ण है। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार प्रयासरत हैं, फिर भी ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस गिरफ्तारी से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच की जा रही है ताकि शराब तस्करी के इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके। पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम जल्द ही इस मामले में और भी बड़े खुलासे कर सकती है।







