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Nepal Politics News: नेपाल में हड़कंप! 23 साल पुराने राजदरबार हत्याकांड की फिर से होगी जांच, खुलेगा 9 लोगों के खूनी रात का सच?

नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने 23 साल पुराने राजदरबार हत्याकांड की दोबारा जांच का ऐलान कर बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है। यह फैसला तब आया जब पुरानी रिपोर्ट पर जनता का अविश्वास बरकरार है, जिससे न्याय की नई उम्मीद और राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

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Nepal Politics News: नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। सुदन गुरूंग ने एक बार फिर देश के गृहमंत्री का पदभार संभाला है, और शपथ लेते ही उन्होंने एक ऐसा बड़ा ऐलान किया है जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। उन्होंने वर्ष 2001 के बहुचर्चित नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड की दोबारा जांच कराने की घोषणा की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है और लोगों के मन में कई सवाल फिर से उठने लगे हैं।

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क्या है नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड का रहस्य?

नेपाल के इतिहास में 1 जून 2001 की रात को एक खूनी अध्याय लिखा गया था, जिसकी गुत्थी आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है। काठमांडू स्थित नारायणहिटी राजदरबार के त्रिभुवन सदन में हुए इस भयानक हत्याकांड को देश की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना ने न केवल शाही परिवार को समाप्त कर दिया, बल्कि पूरे देश को सदमे में डाल दिया था।

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उस रात शाही परिवार के सदस्य एक कार्यक्रम के लिए इकट्ठा हुए थे। शाम साढ़े सात बजे से शुरू हुए इस समारोह में रात करीब नौ बजे अचानक गोलीबारी शुरू हो गई, जिससे मौके पर ही कई लोगों की मौत हो गई। इस गोलीकांड में तत्कालीन राजा वीरेन्द्र वीर विक्रम शाह देव, रानी ऐश्वर्या, युवराज दीपेन्द्र, राजकुमार निराजन, राजकुमारी श्रुति, शान्ति, शारदा, जयन्ती, राजकुमार धीरेन्द्र और कुमार खड्ग विक्रम शाह सहित कुल 9 लोगों की जान चली गई थी।

आधिकारिक जांच में उस समय के युवराज दीपेन्द्र को इस गोलीबारी का दोषी ठहराया गया था। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि राजकुमार दीपेन्द्र ने अपनी माता-पिता और शाही परिवार के अन्य आठ सदस्यों को गोली मारने के बाद खुद को भी समाप्त कर लिया था। हालांकि, इस निष्कर्ष पर घटना के बाद से ही गंभीर सवाल और विवाद उठते रहे हैं, और अधिकांश नेपाली जनता ने इसे कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

इस घटना के तुरंत बाद तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र शाह ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया था, लेकिन उस आयोग की रिपोर्ट भी जनता के संदेह को दूर नहीं कर पाई। पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस हत्याकांड का सच जानने की मांग उठती रही है, क्योंकि कई लोग मानते हैं कि आधिकारिक कहानी में कई महत्वपूर्ण तथ्य छुपाए गए हैं।

गृहमंत्री गुरूंग ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?

सुदन गुरूंग ने मंगलवार को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद विस्तार के तहत राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के समक्ष पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। यह दूसरी बार है जब उन्होंने देश के गृहमंत्री का महत्वपूर्ण पद संभाला है। उनकी वापसी नेपाली राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ लेकर आई है।

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उन्हें इससे पहले भी गृहमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन संपत्ति और आर्थिक अनियमितताओं से संबंधित आरोपों के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हालांकि, सरकार द्वारा गठित एक जांच समिति ने बाद में अपनी रिपोर्ट में उन्हें इन सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

जांच समिति की रिपोर्ट को मंत्रिपरिषद ने स्वीकार कर लिया, जिसके बाद गुरूंग को पुनः गृह मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद, गृहमंत्री गुरूंग ने 1 जून 2001 को हुए नारायणहिटी राजदरबार हत्याकांड (Narayanhiti Palace Massacre) की उपलब्ध रिपोर्टों की समीक्षा करने और आगे की जांच प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी।

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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जोर देकर कहा कि 23 साल बाद भी देश की जनता के मन में इस हत्याकांड की पहली जांच रिपोर्ट को लेकर गहरा संशय बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले गठित आयोगों और समितियों की रिपोर्टों का गहन अध्ययन किया जाएगा, और जरूरत पड़ने पर नए तथ्यों की तलाश के लिए अतिरिक्त जांच भी कराई जाएगी ताकि जनता के मन के सभी संदेह दूर हो सकें।

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नेपाल की राजनीति पर क्या होगा इसका असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस संवेदनशील और ऐतिहासिक मामले में गंभीरता से आगे बढ़ती है, तो नेपाल की राजनीति में एक बार फिर इस घटना को लेकर व्यापक बहस और तीखी सरगर्मी बढ़ सकती है। यह फैसला कई पुरानी परतों को फिर से खोल सकता है।

इस नए घटनाक्रम पर न केवल नेपाल के भीतर सबकी निगाहें टिकी हैं, बल्कि सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों में भी लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। भारतीय नागरिक भी इस राजदरबार हत्याकांड की यादों और उसके रहस्य को अभी तक नहीं भूल पाए हैं, और वे भी उत्सुकता से यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या अब आखिरकार इस खूनी घटना का सच सामने आ पाएगा।

गृहमंत्री का यह कदम देश में न्याय और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई जांच किस दिशा में जाती है और क्या वर्षों पुराना यह रहस्य अब आखिरकार सुलझ पाएगा, जिससे जनता को शांति मिल सके।

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