Bihar Panchayat News: बिहार में ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार करने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। प्रदेश की सभी पंचायतों में अब हर महीने ‘पंचायत विकास दिवस’ का आयोजन किया जाएगा। पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
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हर महीने होगी ग्रामीणों से सीधी बात, जानें समय
दरभंगा, मुजफ्फरपुर सहित बिहार के सभी जिलों की पंचायतों में प्रत्येक महीने की अंतिम रविवार को ‘पंचायत विकास दिवस’ का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदायों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है। पंचायती राज विभाग के सचिव ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का लक्ष्य ग्राम स्वराज की अवधारणा को धरातल पर उतारना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास हो सके।
विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह आयोजन ग्रामीण समुदाय की भागीदारी के माध्यम से वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ग्रामीणों से सीधा जुड़ाव होने के कारण ग्राम पंचायतें इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। इन लक्ष्यों को नौ थीमों में बांटा गया है और कुल 17 निर्धारित लक्ष्य प्राप्त किए जाने हैं।
सचिव ने जोर देकर कहा कि पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों, ग्रामसभा के सदस्यों, महिलाओं, युवाओं और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी तथा उनके बीच सार्थक संवाद के बिना इन उद्देश्यों को पूरा करना असंभव है। इस पहल के माध्यम से बिहार ग्राम स्वराज अभियान को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी।
सांसदों की उपस्थिति और मुखिया की अध्यक्षता में अहम चर्चा
‘पंचायत विकास दिवस’ के आयोजन के दौरान संबंधित क्षेत्र के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि योजनाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। आयोजन से पहले सभी हितधारकों को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें। बैठक की अध्यक्षता ग्राम पंचायत के मुखिया करेंगे, और उनकी अनुपस्थिति में उपमुखिया को यह जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि दोनों अनुपस्थित रहते हैं, तो ग्रामसभा के सदस्यों में से कोई एक अध्यक्ष पद संभालेगा।
इस बैठक में ग्राम पंचायत के माध्यम से चलाई जा रही वर्तमान योजनाओं और भविष्य में प्रस्तावित योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, योजनाओं पर हुए खर्च का पूरा ब्योरा भी ग्रामीणों के सामने रखा जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। प्रत्येक बैठक में निर्धारित नौ थीमों में से किसी एक पर गहन चर्चा की जाएगी, और 10 सप्ताह के बाद पहली थीम पर पुनः विचार-विमर्श किया जाएगा। यह चक्रीय प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि सभी महत्वपूर्ण विकास क्षेत्रों पर नियमित रूप से ध्यान दिया जा सके।
यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और आम जनता को सीधे तौर पर विकास प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा, बल्कि ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के प्रति स्वामित्व की भावना भी मजबूत होगी।
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