Gaya Land News: गया जिला प्रशासन ने जमीन मालिकों को एक दशक से चली आ रही परेशानी से राहत दी है। हाल ही में दो भूखंडों को प्रतिबंधित सूची से हटा दिया गया है, जिससे अब उनकी बिक्री और रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि यह कदम 2012 से 2018 के बीच विभिन्न कारणों से प्रतिबंधित की गई जमीनों की समीक्षा का हिस्सा है।
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सालों से लंबित मामलों का निपटारा
जिला प्रशासन ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले सालों से अनसुलझे पड़े थे, जिससे जमीन मालिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे थे। शुभंकर ने बताया कि लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने और जनता की असुविधा को कम करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की गई है। इसी कवायद के तहत दो संपत्तियों को प्रतिबंधित सूची से हटाने की मंजूरी दी गई।
किन भूखंडों को मिली हरी झंडी?
अधिकारियों के अनुसार, इनमें से एक भूखंड वजीरगंज अंचल के भिंडास मौजा में संजय कुमार का है। यह जमीन 2013 से प्रतिबंधित सूची में थी। विस्तृत जांच के बाद प्रशासन ने इसे निजी और विवाद रहित पाया। दूसरा भूखंड चंडौती अंचल के कंडी मौजा में गणेश चौधरी का है। यह 2012 से प्रतिबंधित सूची में था और सत्यापन के बाद इसे भी हरी झंडी मिल गई।
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अगली कतार में और भी फाइलें
जिलाधिकारी ने जिला उप-रजिस्ट्रार और सभी उप समाहर्ता भू-सुधार (DCLR) को अन्य लंबित मामलों से संबंधित फाइलें जल्द समीक्षा के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां कोई कानूनी बाधा नहीं है, किसी भी जमीन मालिक को अनावश्यक देरी या बार-बार कार्यालय आने की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
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प्रतिबंधित सूची में कैसे आती है जमीन?
अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर जमीन को प्रतिबंधित सूची में तब डाला जाता है, जब यह सरकारी जमीन होने का दावा किया जाता है, अधिग्रहण के अधीन होती है, भूमि हदबंदी विवाद से जुड़ी होती है, या लंबित अदालती मामलों के अधीन होती है। ऐसे मामलों की जांच अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (राजस्व), जिला उप-रजिस्ट्रार, डीसीएलआर और संबंधित अंचल अधिकारी सहित एक जिला-स्तरीय समिति करती है। प्रशासन ने कहा कि समिति की सिफारिशों के बाद हाल के महीनों में 132 से अधिक मामले निपटाए गए हैं, और आने वाले हफ्तों में और समीक्षाएं अपेक्षित हैं।







