Bhagalpur Delivery News: भागलपुर के नाथनगर रेफरल अस्पताल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां डॉक्टर के बदले नर्स द्वारा डिलीवरी कराए जाने के बाद एक नवजात शिशु की दुखद मौत हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल के भीतर ही जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, नर्स पर लापरवाही का इल्जाम
पीड़ित परिवार ने बताया कि वे सुबह करीब सात बजे बिहारीपुर से पूजा कुमारी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। नर्स ने मरीज की शुरुआती जांच की, लेकिन जब चिट्ठा बनाने की बात आई तो उसे कुछ देर बाद बनाने की बात कहकर टाल दिया गया। मरीज को प्रसव पीड़ा बढ़ने लगी, जिसके बाद नर्स ने खुद ही डिलीवरी करा दी।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि डिलीवरी के समय कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया कि नर्स ने बच्चे को जन्म देने के लिए पूजा कुमारी के पेट पर चढ़कर काफी जोर लगाया। इसके कुछ देर बाद ही जन्मी बच्ची की मौत हो गई। परिवार ने अस्पताल प्रबंधन पर सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
डॉक्टर और नर्सों के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान
इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अन्वेषा ने पत्रकारों को बताया कि वह लेबर रूम में दो बार गईं। उन्होंने नर्स रंजना और मधुलिका से मरीज के संबंध में पूछा, लेकिन उन्हें पूजा कुमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। डॉक्टर अन्वेषा के अनुसार, नर्सों ने डिलीवरी होने के बाद ही उन्हें सूचित किया।उन्होंने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र (BST) लिखने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि इसकी जिम्मेदारी दोनों नर्सों और प्रभारी की है। डॉक्टर अन्वेषा ने यह भी बताया कि नर्सों ने उन्हें डिलीवरी के लगभग 40 मिनट बाद जानकारी दी, जबकि उनकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से थी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रात की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स ने भी उन्हें मरीज के बारे में कुछ नहीं बताया था।
अस्पताल प्रभारी ने दी मामले पर सफाई
इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रभारी डॉक्टर अनुपमा सहाय का बयान परिजनों और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के बयान से अलग है। उन्होंने बताया कि मरीज ने अस्पताल में विधिवत भर्ती होकर चिट्ठा नहीं बनवाया था। उनके अनुसार, मरीज आकर किसी दूसरे कमरे में बैठ गई थी और उसकी शारीरिक हालत पहले से ही गंभीर थी।डॉक्टर सहाय ने कहा कि जब मरीज को अत्यधिक दर्द हुआ, तब जल्दबाजी में डिलीवरी कराई गई और उस समय तक बच्चे की मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने इस मौत के पीछे किसी डॉक्टर या नर्स की गलती होने से साफ इनकार किया है। हालांकि, घटना के बाद उन्होंने कैमरे पर यह कहकर भी पल्ला झाड़ लिया था कि उनकी ड्यूटी ऑफिस के काम की थी और इस बारे में डॉक्टर अन्वेषा बेहतर बता सकती हैं।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंआप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।इस दुखद घटना ने नाथनगर रेफरल अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों की मांग है कि लापरवाह स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस Bhagalpur Hospital Negligence मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।







