बिहार में सरकारी नौकरी का सपना दिखा कर बेरोजगार युवाओं को ठगने का एक बड़ा मामला सामने आया है। पटना पुलिस ने सीतामढ़ी के एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान के संचालक को करोड़ों की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी उन हजारों युवाओं के लिए एक राहत की खबर हो सकती है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में ऐसे जालसाजों के चंगुल में फंस जाते हैं।
पटना पुलिस ने सीतामढ़ी के नाहर चौक पर स्थित आरंभिका क्लासेस के संचालक संतोष बिहारी को नौकरी दिलाने के बहाने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जहाँ से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संतोष बिहारी मूल रूप से मेजरगंज के डुमरी क्षेत्र का निवासी है और काफी समय से इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त था। यह गिरफ्तारी उन हजारों युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो ऐसे जालसाजों के शिकार बन रहे थे।
करोड़ों की ठगी का यह बड़ा खुलासा कैसे हुआ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संतोष बिहारी पिछले काफी समय से बिहार के विभिन्न जिलों के बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था। वह उन्हें रेलवे, बैंक, पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में उच्च पदों पर नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देता था। इन झूठे आश्वासनों के एवज में वह प्रत्येक उम्मीदवार से 5 लाख से 15 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलता था। यह पूरी योजना अत्यंत सुनियोजित तरीके से अंजाम दी जा रही थी।
कई युवाओं ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार की जमा पूंजी, खेत बेचकर और ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर संतोष बिहारी को पैसे दिए थे। नौकरी न मिलने पर जब वे पैसे वापस मांगने लगे, तो उन्हें लगातार टालमटोल किया जाने लगा और धमकियाँ भी दी गईं। इस धोखाधड़ी के कारण कई युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है और उनके परिवारों पर भी गहरा आर्थिक संकट आ पड़ा है। यह बिहार नौकरी धोखाधड़ी ने राज्य के कई परिवारों को प्रभावित किया है और उनके सपनों को तोड़ दिया है।
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पटना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया था। इस टीम ने कई दिनों तक संतोष बिहारी की गतिविधियों पर नजर रखी और पुख्ता सबूत जुटाए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई थीं और शुरुआती जांच में उसके पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की कोशिश कर रही है और इसमें शामिल अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पूरे उत्तर बिहार में फैला था ठगी का काला कारोबार
बताया जा रहा है कि संतोष बिहारी का ठगी का नेटवर्क सिर्फ सीतामढ़ी तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसके तार उत्तर बिहार के कई अन्य जिलों में गहराई से फैले हुए थे। मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर और मधुबनी जैसे जिलों में भी उसके एजेंट सक्रिय थे। ये एजेंट ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के भोले-भाले युवाओं को आसानी से फंसाते थे और संतोष बिहारी तक पहुंचाते थे।
सैकड़ों की संख्या में युवा इस जालसाजी का शिकार हुए हैं, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई और मेहनत से जमा किए गए पैसे गंवा दिए हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी का शिकार बनना कितना आसान है, खासकर जब बेरोजगारी चरम पर हो। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे प्रलोभनों से बचें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या संस्था पर विश्वास न करें।
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पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है और गिरफ्तार आरोपी संतोष बिहारी से गहन पूछताछ जारी है। उम्मीद है कि उसकी निशानदेही पर इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकेगा। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के नाम पर भी लोगों को ठगा हो सकता है।
प्रशासन ने इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे नौकरी के विज्ञापनों और प्रस्तावों की सच्चाई को हमेशा सत्यापित करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध जानकारी या धोखाधड़ी के प्रयासों की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दें, ताकि ऐसे जालसाजों को समय रहते पकड़ा जा सके और समाज को उनके कुकृत्यों से बचाया जा सके।
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इस महत्वपूर्ण मामले पर देशज टाइम्स बिहार लगातार नजर बनाए हुए है। जांच में जैसे ही कोई नया अपडेट सामने आएगा या कोई और गिरफ्तारी होती है, हमारे पाठकगणों को तुरंत सूचित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि आप तक हर सच्ची और सटीक खबर सबसे पहले पहुंचे।







