Bihta IAF News: असम के जोरहाट एयरबेस में हुए हृदयविदारक विमान हादसे के बाद बिहार के दो वीर सपूतों का पार्थिव शरीर रविवार को पटना के बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। अग्निवीर दानिश आलम और फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की अंतिम घर वापसी से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अपने लाडले बेटों को अंतिम सलाम देने के लिए हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य द्वार के बाहर इकट्ठा हो गए। यह मंजर देखकर हर कोई भावुक हो उठा।
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देश के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब
शहीदों के पार्थिव शरीर के बिहटा पहुंचने से काफी पहले ही, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के हाथों में तिरंगा झंडा लिए भारी भीड़ जुटने लगी थी। हर कोई अपने देश के बहादुर बेटों को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बेताब था, जिनकी शहादत ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया है। पूरे इलाके में ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘अमर शहीद अमर रहें’ जैसे देशभक्ति नारों की गूंज सुनाई दे रही थी। यह भावुक और गर्व से भरा माहौल हर किसी की आंखों में आंसू ले आया और हर दिल को देशप्रेम से भर दिया।
इस दौरान, सड़क के दोनों किनारे खड़े लोगों ने अपने हाथों में फूल लिए थे और अपने शहीदों को सम्मान देने के लिए उन्हें श्रद्धापूर्वक बरसाया। बिहार अग्निवीर न्यूज के मुताबिक, अग्निवीर दानिश आलम भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के कमरियांव गांव के रहने वाले थे, जबकि फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव के निवासी थे। दोनों जिलों में उनकी शहादत की खबर सुनते ही गहरा सदमा फैल गया था और हर तरफ मातम पसर गया।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बिहटा एयरफोर्स स्टेशन परिसर में भारतीय वायुसेना ने दोनों शहीदों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारी और कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने वीर सपूतों के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह पल बेहद गमगीन था, जहां हर आंख नम थी, लेकिन देश के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान पर हर किसी को गर्व की अनुभूति भी हो रही थी।
यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का हृदय देश प्रेम और दुख से भर गया। शहीदों की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग बिहटा पहुंचे थे। उनके परिजनों के असीम दुख में हर कोई शामिल था, जो उनके बलिदान की महिमा को भी दर्शा रहा था। इस सम्मान समारोह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि देश अपने वीर जवानों को कभी नहीं भूलता।
दानिश के दोस्त ने साझा की यादें, शहादत पर गर्व
शहीद अग्निवीर दानिश आलम के बचपन के मित्र विश्वजीत तिवारी ने मीडिया को बताया कि दानिश शुरू से ही अत्यंत मिलनसार, अनुशासित और देशभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्ति थे। उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय वायुसेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था। वायुसेना में चयनित होने के बाद वह बहुत प्रसन्न थे और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते थे। दानिश ने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के समापन के बाद, दानिश आलम का पार्थिव शरीर भोजपुर के कमरियांव गांव और शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद के बनवरिया गांव के लिए पूरे सम्मान के साथ रवाना कर दिया गया। रास्ते भर कई जगहों पर लोग फूल और तिरंगा लेकर खड़े थे, अपने वीर सपूतों को अंतिम सलामी देने को आतुर थे। सड़क के किनारे देशभक्ति के नारे लगाते हुए लोग अपने नायकों को विदा कर रहे थे। यह शहादत न केवल उनके परिवारों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरा और कभी न भरने वाला घाव है।
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गौरतलब है कि जोरहाट एयरबेस पर हुए दुखद एएन-32 विमान हादसे में भारतीय वायुसेना के पांच जवानों की जान चली गई थी, जिनमें से ये दोनों बिहार के बहादुर लाल भी शामिल थे। शहीदों की यह अंतिम यात्रा पूरे क्षेत्र में एक अद्वितीय शोक और गर्व का माहौल बना रही है। बिहटा से लेकर उनके पैतृक गांवों तक, हर आंख नम है, लेकिन देश के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है। उनकी वीरता, साहस और समर्पण की यह अमर कहानी आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी और देश की सेवा के लिए प्रोत्साहित करेगी।







