Patna RJD News: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिग्गज नेता और बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य लालू प्रसाद यादव के “कबाब मंत्री” के नाम से जाने जाने वाले पूर्व MLC अनवर अहमद का निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मेदांता अस्पता अनवर अहमद का रविवार सुबह लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे पटना के एक निजी अस्पताल, मेदांता में इलाज करवा रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे राजद खेमे, उनके समर्थकों और खासकर पटना के सब्जीबाग क्षेत्र में गहरा शोक छा गया है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका जाना बिहार की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है।
अनवर अहमद अपने पीछे पुत्र असफर अहमद को छोड़ गए हैं, जो वर्तमान में सब्जीबाग वार्ड से पार्षद के तौर पर सक्रिय हैं। उनका राजनीतिक जीवन दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने बिहार की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन बिहार की सियासत में एक युग के अंत का प्रतीक माना जा रहा है।
लालू प्रसाद यादव के सबसे करीबी सहयोगी का निधन
अनवर अहमद ने नब्बे के दशक में जनता दल के साथ अपनी सक्रिय राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। वह दौर बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लेकर आया था, जब लालू प्रसाद यादव एक मजबूत नेता के तौर पर उभरे। अनवर अहमद जल्द ही लालू प्रसाद यादव के सबसे विश्वस्त और करीबी सहयोगियों में शुमार हो गए। राजनीतिक गलियारों में उन्हें हमेशा लालू प्रसाद यादव के दाहिने हाथ के रूप में देखा जाता था।
पार्टी और संगठन के भीतर उनकी राय को अत्यधिक महत्व दिया जाता था। वे उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिनकी सलाह पर लालू यादव अक्सर गौर करते थे। उनकी संगठनात्मक क्षमता और जमीनी स्तर पर पकड़ ने उन्हें राजद के लिए एक अमूल्य संपत्ति बना दिया था। उनकी यह निकटता और प्रभाव दशकों तक कायम रहा, जिससे वे बिहार की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
उनकी राजनीतिक सक्रियता और अनुभव को देखते हुए उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया था। विधान पार्षद के रूप में उन्होंने विधानसभा के पटल पर विभिन्न सामाजिक न्याय और जनसरोकार के मुद्दों को पूरी दृढ़ता से उठाया। उन्होंने हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज बनने का काम किया, जिससे उनकी पहचान एक जननेता के रूप में और मजबूत हुई।
अवामी बैंक की चेयरमैनशिप और सब्जीबाग की पहचान
राजनीति के दायरे से बाहर भी अनवर अहमद की एक बड़ी पहचान थी। वे लंबे समय तक अवामी कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन भी रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को आम आदमी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर उन लोगों तक जिनकी पहुंच बड़े बैंकों तक नहीं थी। बैंकिंग और सामाजिक कार्यों के माध्यम से उन्होंने समाज के बड़े तबके के बीच अपनी पैठ बनाई।
पटना के सब्जीबाग क्षेत्र में उनका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव इतना गहरा था कि वे वहां के पर्याय बन गए थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी सीधी पहुंच और हर छोटे-बड़े मसले पर उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया। उन्होंने क्षेत्र के कई सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से काम किया, जिससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई। Anwar Ahmed Death से इस क्षेत्र के लोगों में भारी दुख और मायूसी का माहौल है, क्योंकि उन्होंने अपना एक सच्चा सेवक खो दिया है।
रोहिणी आचार्य और अखिलेश प्रसाद सिंह ने जताया दुख
अनवर अहमद के निधन की खबर पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री और पार्टी की नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने भावुक होकर लिखा, “अल्लाह तआला मरहूम अनवर अंकल को मगफिरत अता करें और उनके परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की ताकत दें।” रोहिणी आचार्य ने अनवर अहमद को अपने परिवार का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि बचपन से लेकर अब तक उनसे जुड़ी अनगिनत यादें हैं। उनका व्यक्तिगत रूप से जाना उनके लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई मुश्किल है।
यह भी उल्लेखनीय है कि उनके निधन से महज एक दिन पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर अनवर अहमद का हालचाल जाना था। उन्होंने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था, और रविवार सुबह उनके निधन की दुखद खबर सामने आई, जिससे राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। बिहार की राजनीति में अनवर अहमद के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन राजद और बिहार के राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई करना कठिन होगा। उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता उनके जाने से गहरे सदमे में हैं और उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं।
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