Bihar Education: बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य के 211 नए डिग्री कॉलेजों में अगले शैक्षणिक सत्र से उर्दू और मैथिली विषयों की पढ़ाई शुरू करने का आदेश राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने दिया है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
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उच्च शिक्षा में नए आयाम: क्या है राज्यपाल का निर्देश?
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उच्च शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि राज्य के नवसृजित 211 डिग्री महाविद्यालयों में उर्दू और मैथिली भाषाओं के अध्ययन को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। यह निर्णय क्षेत्रीय भाषाओं के प्रोत्साहन और छात्रों को अधिक विकल्प प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आगामी शैक्षणिक सत्र से इन विषयों की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उनकी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है। राज्यपाल ने राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। यह छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
छात्रों को मिलेगा फायदा: एनएसएस और एनसीसी पर भी जोर
उर्दू और मैथिली विषयों की पढ़ाई शुरू होने से इन भाषाओं में रुचि रखने वाले हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें अपने गृह राज्य में ही इन विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, एनएसएस और एनसीसी गतिविधियों को बढ़ावा देने से छात्रों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सेवा की भावना विकसित होगी।
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इस पहल से छात्रों को अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे भाषाई विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा विभाग अब इस आदेश को लागू करने की दिशा में तेजी से काम करेगा, ताकि अगले सत्र से इसकी शुरुआत हो सके।







