
Bihar Tender Scam: बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) के शिकंजे में आया भ्रष्ट ठेकेदार रिशुश्री पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है। एसवीयू की टीम ने उसे रिमांड पर लेकर 30 घंटे से अधिक समय तक गहन पूछताछ की, लेकिन जानकारी के मुताबिक, उसने कोई ठोस या बड़ी जानकारी नहीं दी। हालांकि, इस दौरान रिशुश्री ने एक बड़ा कबूलनामा करते हुए कहा कि सरकारी कामकाज बिना लेनदेन के नहीं होता है और ‘खर्चा’ को जरूरी बताया।
सरकारी काम बिना घूस दिए नहीं होता है।
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सक्षम न्यायालय ने रिशुश्री को पांच दिनों की रिमांड पर एसवीयू को सौंपा था, लेकिन उसके असहयोगात्मक रवैये के कारण उसे चार दिन में ही वापस बेऊर जेल भेज दिया गया। 16 जून, मंगलवार को शुरू हुई यह पूछताछ 20 जून तक चलनी थी।
रिशुश्री का असहयोग और SVU की रणनीति
विशेष निगरानी इकाई के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रिमांड के दौरान हर दिन रिशुश्री का व्यवहार असहयोगात्मक रहा। उसने एसवीयू के कई सवालों के जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। टीम ने उससे हर दिन औसतन सात से आठ घंटे तक लगातार पूछताछ की, और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। एसवीयू ने पूछताछ के लिए पहले से ही पांच दर्जन से अधिक सवाल तैयार किए थे। अधिकारियों की अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं, जो अपने-अपने सवालों पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं।
पूछताछ में सरकारी ठेके हासिल करने के तरीके, अधिकारियों के साथ संबंध बनाने के तरीके, अधिकारियों की मौज-मस्ती पर किए जाने वाले खर्च, मनमाफिक छोटे अधिकारियों की तैनाती कराने और ठेका हासिल करने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण सवाल शामिल थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आई बातों की सच्चाई जानने से जुड़े सवाल भी रिशुश्री से पूछे गए।
छापेमारी और आगे की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान छोटी-छोटी कड़ियों को जोड़कर अनुसंधान को गति देने की कोशिश की गई, ताकि कोर्ट के सामने सही तथ्यों को साक्ष्य के साथ पेश किया जा सके। खासकर पैरवी कराकर ठेका हासिल करने के सवाल पर रिशुश्री ने किसी भी तरह का ठोस साक्ष्य या जानकारी देने से इनकार कर दिया। विभिन्न सरकारी विभागों के बड़े अधिकारियों के साथ संपर्क या संबंध को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में रिशुश्री ने उन्हें सरकारी कामकाज के सिलसिले में हुई मुलाकातें बताया। वहीं, छोटे अधिकारियों की पोस्टिंग कराने से लेकर अपने संबंधों और रसूख के इस्तेमाल पर उसने चुप्पी साध ली।
एसवीयू सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दो निलंबित आईएएस अधिकारियों, अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार, और आरोपित पवन कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान कुछ कागजात और आरोपितों के परिजनों के बैंक खाते जब्त किए गए हैं।
अब विशेष निगरानी इकाई टेंडर घोटाला मामले में जेल में बंद रिशुश्री के सहयोगी संतोष और गिरफ्तार अधिकारियों तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश सिंह को भी रिमांड पर ले सकती है। इसके अलावा, फरार चल रहे आईएएस संजीव हंस, योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा को भी जांच टीम के सामने पेश होना है, जिनकी तलाश जारी है।











