Bihar High Court: बिहार में शराबबंदी कानून के गलत इस्तेमाल पर पटना हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक ऐसे मामले में जहां केवल गंध के आधार पर एक ट्रक को जब्त कर लिया गया था और उसमें शराब नहीं मिली, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ट्रक मालिक को 2.15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने शराबबंदी कानून के दुरुपयोग के इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।






गंध के आधार पर जब्त किया गया था ट्रक
यह पूरा मामला गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र से जुड़ा है। राजेश कुमार यादव नामक एक ट्रक मालिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी याचिका के अनुसार, पुलिस ने उनके ट्रक को सिर्फ इस संदेह पर जब्त कर लिया था कि उसमें शराब हो सकती है। पुलिस ने ‘गंध के आधार’ पर कार्रवाई की, लेकिन जब ट्रक की तलाशी ली गई तो उसमें कोई शराब नहीं मिली।
“पटना हाईकोर्ट ने गोपालगंज के कुचायकोट थाना में करीब 10 महीने से जब्त एक ट्रक के मामले में राज्य सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की है।”
बावजूद इसके, ट्रक को लगभग दस महीने तक कुचायकोट थाने में जब्त रखा गया। इस लंबी अवधि तक ट्रक जब्त रहने से मालिक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को कानून का दुरुपयोग माना है।
पुलिसकर्मियों पर होगी विभागीय कार्रवाई
राजेश कुमार यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ट्रक मालिक को 2 लाख रुपये का मुआवजा दे। इसके अतिरिक्त, मुकदमे के खर्च के रूप में 15 हजार रुपये भी दिए जाएंगे, जिससे कुल राशि 2.15 लाख रुपये हो जाती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस तरह से बिना सबूत के किसी वाहन को जब्त करना और उसे लंबे समय तक रोके रखना पूरी तरह से गलत है। यह फैसला बिहार में शराबबंदी कानून के तहत पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्रवाईयों पर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है और यह सुनिश्चित करता है कि कानून का पालन करते समय नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो। इस आदेश से पुलिस अधिकारियों पर भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने का दबाव बढ़ेगा।







