Bihar ITR Filing: आयकर विभाग ने अपने ई-फाइलिंग पोर्टल में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित और सरल हो गई है। बिहार सहित देशभर के लाखों वेतनभोगी व्यक्तियों, पेंशनभोगियों और अन्य पात्र करदाताओं को अब अद्यतन फॉर्म और प्री-फिल्ड डेटा की सुविधा मिलेगी, जिससे अनुपालन में आसानी होगी और समय पर रिटर्न दाखिल करने में मदद मिलेगी। विभाग ने सभी प्रमुख आईटीआर फॉर्म ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए हैं, साथ ही फॉर्म-16 और टीडीएस से संबंधित विवरणों को भी अपडेट किया है।
प्री-फिल्ड डेटा से आसान हुई प्रक्रिया
नए अपडेटेड सिस्टम के अनुसार, सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), बैंकों और निजी नियोक्ताओं से संबंधित अधिकांश वेतन, टीडीएस और ब्याज की जानकारी अब पोर्टल पर एकीकृत कर दी गई है। इससे करदाताओं को प्री-फिल्ड डेटा तक पहुंच मिल सकेगी, जिससे मैन्युअल एंट्री कम होगी और रिटर्न दाखिल करते समय गलतियों की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम करदाताओं के लिए प्रक्रिया को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाता है।






आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथियां
कर विशेषज्ञों ने आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियों के बारे में जानकारी दी है। जो व्यक्ति व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, उन्हें 31 जुलाई तक अपना आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। वहीं, उन करदाताओं के लिए जो व्यवसाय चलाते हैं लेकिन ऑडिट के अधीन नहीं हैं, अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है। विशेषज्ञों ने समय पर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी है, ताकि जुर्माने और विलंब शुल्क से बचा जा सके।
रिटर्न दाखिल करने से पहले इन दस्तावेजों की करें जांच
कर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि रिटर्न जमा करने से पहले करदाता कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच कर लें। इनमें फॉर्म-16, फॉर्म 26AS, वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और करदाता सूचना सारांश (TIS) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक ब्याज प्रमाण पत्र, बचत और निवेश का प्रमाण, पूंजीगत लाभ विवरण और गृह ऋण से संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि फॉर्म-16 और फॉर्म 26AS के बीच कोई विसंगति पाई जाती है, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले नियोक्ता या कटौतीकर्ता से त्रुटि को ठीक करवाना आवश्यक है।
अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन और प्री-फिल्ड डेटा पर निर्भरता करदाताओं को फाइलिंग प्रक्रिया के दौरान गलतियों, देरी और दंड से बचने में मदद कर सकती है। यह सुविधा करदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयकर विभाग के इस कदम से करदाताओं को निश्चित रूप से राहत मिलेगी और वे बिना किसी परेशानी के अपने रिटर्न समय पर दाखिल कर पाएंगे। भविष्य में भी विभाग द्वारा ऐसी ही तकनीकी प्रगति की उम्मीद है, जिससे करदाताओं के लिए प्रक्रिया और सुगम हो सके।







