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पहले राहत, फिर बढ़ी मुसीबत, दोपहर की बारिश ने रोकी उम्मीद: दरभंगा में कुदरत का कहर! मूसलाधार बारिश से रुकी धानरोपनी, खेतों में डूबे बिचड़े

Darbhanga Rain: जाले प्रखंड के रतनपुर में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों को पहले राहत दी, लेकिन दोपहर में अत्यधिक जलभराव से धानरोपनी का काम ठप हो गया और खेतों में बिचड़े डूबने लगे।

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Darbhanga Rain: बिहार के दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत रतनपुर और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों और सड़कों पर पानी भर जाने से जहां आवागमन प्रभावित हुआ, वहीं धानरोपनी का महत्वपूर्ण कार्य भी बुरी तरह बाधित हो गया। सुबह मिली राहत दोपहर होते-होते आफत में बदल गई, जिससे बिचड़े डूबने लगे और मजदूर खेत छोड़कर घर लौटने को मजबूर हो गए।

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रतनपुर में बारिश बनी आफत! पहले मिली राहत, फिर खेतों में डूबा बिचड़ा, धानरोपनी ठप

Bihar Ratanpur Rain: जाले प्रखंड के रतनपुर और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. सुबह की तेज बारिश से जहां किसानों को सिंचाई की समस्या से फौरी राहत मिली, वहीं दोपहर में हुई झमाझम बारिश ने खेतों में इतना पानी भर दिया कि धानरोपनी का काम पूरी तरह से ठप हो गया. खेतों के साथ-साथ सड़कों पर भी जलजमाव हो गया, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ है.

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पहले राहत, फिर बढ़ी मुसीबत

सुबह करीब छह बजे से लगभग एक घंटे तक हुई तेज बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे थे. पर्याप्त पानी मिलने पर उन्होंने तुरंत कदवा कर धानरोपनी शुरू कर दी. मजदूर नर्सरी से बिचड़ा उखाड़ने में जुट गए और किसान खेतों की मेड़ दुरुस्त करने लगे. ऐसा लगा कि अब धान की खेती पटरी पर आ जाएगी. लेकिन, यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई.

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दोपहर की बारिश ने रोकी धानरोपनी

दोपहर करीब डेढ़ बजे एक बार फिर तेज बारिश शुरू हो गई. बारिश की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि खेतों में काम कर रहे मजदूरों को अपना काम छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा. जब बारिश थमी और वे दोबारा रोपनी के लिए खेतों में पहुंचे, तो देखा कि खेतों में पानी इतना अधिक भर गया था कि बिचड़ा पूरी तरह डूबने लगा. इस स्थिति में धानरोपनी का कार्य बाधित हो गया और थक-हारकर मजदूर खेतों में ही बिचड़ा छोड़कर अपने घरों को लौट गए.

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स्थानीय क्षेत्रों में सामान्य रहा जनजीवन

रतनपुर के किसानों को जहां एक तरफ सिंचाई की समस्या से बड़ी राहत मिली, वहीं अत्यधिक जलभराव ने उनके लिए नई चुनौती खड़ी कर दी. धानरोपनी की गति पूरी तरह थम गई है. हालांकि, प्रखंड मुख्यालय सहित जोगियारा, गररी, बंधौली और कमतौल जैसे क्षेत्रों में केवल हल्की फुहारें पड़ीं. इन इलाकों में खेती-किसानी और जनजीवन सामान्य बना रहा. रतनपुर के किसान अब खेतों से पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं ताकि धानरोपनी का कार्य दोबारा शुरू किया जा सके.

सुबह की बारिश से मिली थी उम्मीद, दोपहर में टूटा किसानों का हौसला

शुक्रवार की सुबह करीब छह बजे से लगभग एक घंटे तक हुई तेज बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी थी। पर्याप्त पानी मिलने के बाद किसानों ने तेजी से कदवा कर धानरोपनी का काम शुरू कर दिया। मजदूर नर्सरी से बिचड़ा उखाड़ने में जुट गए, जबकि किसान खेतों की मेड़ दुरुस्त करने में लगे थे। सभी को उम्मीद थी कि अब धान की रोपनी सुचारु रूप से हो पाएगी।

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लेकिन, दोपहर करीब डेढ़ बजे एक बार फिर तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। जब बारिश थमी और वे दोबारा रोपनी के लिए खेतों में पहुंचे, तब तक अत्यधिक जलभराव के कारण धान के बिचड़े डूबने लगे थे। इस स्थिति को देखते हुए धानरोपनी का कार्य बाधित हो गया और मजदूर बिचड़ा खेतों में ही छोड़कर अपने घरों को लौट गए।

सिंचाई की समस्या से राहत, पर रोपनी की गति थमी

लगातार हुई बारिश ने किसानों को सिंचाई की समस्या से तो राहत दी है, लेकिन खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भर जाने के कारण धानरोपनी की गति पूरी तरह थम गई है। यह समय धानरोपनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, और ऐसे में काम रुकने से किसान चिंतित हैं। उन्हें अब पानी उतरने का इंतजार करना पड़ेगा, जिसके बाद ही वे दोबारा काम शुरू कर पाएंगे।

इसके विपरीत, प्रखंड मुख्यालय सहित जोगियारा, गररी, बंधौली और कमतौल जैसे अन्य क्षेत्रों में केवल हल्की फुहारें पड़ीं। इन इलाकों में खेती-किसानी और जनजीवन सामान्य बना रहा, जिससे वहां के किसानों को रतनपुर जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।

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