Bihar Child Marriage: बिहार में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसी कड़ी में भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड मुख्यालय स्थित ट्रायसम भवन में बाल विवाह रोकथाम को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया, जिसमें बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने और जागरूकता अभियान को तेज करने पर जोर दिया गया।
कड़े निर्देश और सामाजिक भागीदारी पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्र गुप्ता ने बाल विवाह को एक गंभीर सामाजिक कुरीति बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बुराई को समाप्त करने के लिए सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। गुप्ता ने सभी विभागों और जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सघन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही, किसी भी संदिग्ध बाल विवाह की सूचना तत्काल प्रशासन को देने और बाल विवाह निषेध अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने का आदेश दिया।






कानून का उल्लंघन करने वालों की अब खैर नहीं
बैठक में बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बाल विवाह कराने या इसमें किसी भी तरह से सहयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिमन्यु कुमार के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में प्रमुख रश्मि कुमारी, पंचायत समिति सदस्य, सभी मुखिया, सरपंच, पंचायत सचिव, थाना प्रभारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निलेश कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ छोटे लाल, कल्याण पदाधिकारी, जीविका के पदाधिकारी जाहिद इमाम, महिला पर्यवेक्षिका, विकास मित्र, जीविका के सीएलएफ अध्यक्ष, दीदी, काजी, पुजारी, डीजे संचालक और विवाह भवन संचालक भी उपस्थित थे।
धर्मगुरुओं, विवाह भवन संचालकों और डीजे संचालकों से विशेष अपील की गई कि वे बाल विवाह की किसी भी घटना की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। उन्हें इस सामाजिक बुराई को रोकने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
बैठक के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में बाल विवाह मुक्त समाज बनाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। यह पहल बाल विवाह के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है और प्रशासन व समाज के सामूहिक प्रयासों से इस कुप्रथा को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।








