Bihar Motipur Sugar Mill: मुजफ्फरपुर में पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक मोतीपुर चीनी मिल को दोबारा चालू करने की सरकारी कवायद अब धरातल पर उतरने लगी है। बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने मिल की लीज वाली जमीन को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया में तेजी ला दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को लीज पर दी गई कुल 266.66 एकड़ भूमि को वापस अधिग्रहित किया जाना है।
इस भूमि पर न केवल एक नई आधुनिक चीनी मिल स्थापित की जाएगी, बल्कि गन्ना विकास केंद्र (गन्ना अनुसंधान संस्थान) और चीनी उद्योग से जुड़े कई अन्य सहायक उद्योग भी लगाए जाएंगे। इस कदम से मुजफ्फरपुर और उसके पड़ोसी जिलों के लाखों गन्ना किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है, साथ ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।






बड़ी खबर! मोतीपुर चीनी मिल फिर खुलेगी, जमीन वापसी का काम शुरू, लाखों किसानों को फायदा
Bihar Motipur Sugar Mill: बिहार के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुजफ्फरपुर जिले में पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक मोतीपुर चीनी मिल को फिर से चालू करने की सरकारी कवायद अब धरातल पर उतरने लगी है। बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के निर्देश के बाद, जिला प्रशासन ने मिल की लीज वाली जमीन को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया को तेज कर दिया है। यह कदम क्षेत्र के लाखों किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा।

इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत, इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को लीज पर दी गई कुल 266.66 एकड़ भूमि को वापस अधिग्रहित किया जाना है। इस जमीन पर न केवल एक आधुनिक चीनी मिल स्थापित की जाएगी, बल्कि गन्ना विकास केंद्र (गन्ना अनुसंधान संस्थान) और चीनी उद्योग से जुड़े कई अन्य सहायक उद्योग भी लगाए जाएंगे। यह पहल मुजफ्फरपुर और पड़ोसी जिलों की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।
मोतीपुर मिल की जमीन वापसी की प्रक्रिया शुरू
भूमि के वास्तविक सीमांकन और हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मुजफ्फरपुर के अपर समाहर्ता (राजस्व) प्रशांत कुमार ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद, एडीएम ने जिले के 7 अलग-अलग अंचलों से 17 कुशल अमीनों की विशेष प्रतिनियुक्ति मोतीपुर अंचल में की है। इन सभी अमीनों को सोमवार, 20 जुलाई से ही योजना स्थल पर पहुंचकर संयुक्त रूप से जमीन की मापी और सीमांकन का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
यह पूरी मापी प्रक्रिया मोतीपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) तरुण कुमार की सीधी निगरानी और मॉनिटरिंग में संचालित की जा रही है। एडीएम प्रशांत कुमार ने सख्त हिदायत दी है कि सभी प्रतिनियुक्त अमीन अगले तीन दिनों के भीतर, यानी निर्धारित समय सीमा में, पूरी जमीन का सटीक मापन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मोतीपुर सीओ को सौंपेंगे।
तीन दिनों में सौंपी जाएगी रिपोर्ट, मिलेगा किसानों को लाभ
मापी कार्य के तुरंत बाद, इसी सप्ताह के अंत तक अंचल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट को जिलाधिकारी (डीएम) के माध्यम से राज्य के गन्ना उद्योग विभाग को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल 266.66 एकड़ लीज की जमीन विभिन्न राजस्व ग्रामों (मौजों) के अंतर्गत आती है, जिसका मापन तीन दिनों तक लगातार चलेगा।
इसमें मोतीपुर मौजे के तहत 96.37 एकड़, बखरा में 28.58 एकड़, बरियारपुर में सबसे अधिक 114.57 एकड़, सुंदर सराय में 19.14 एकड़ और पचरुखी मौजे के अंतर्गत आने वाली 8 एकड़ भूमि शामिल है। इन सभी स्थानों पर सीमांकन के लिए मोतीपुर के अलावा कुढ़नी, कांटी, पारू, साहेबगंज, मड़वन और सरैया अंचल से अमीनों को बुलाया गया है।
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि इस जमीन को आईपीएल से वापस लेकर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा दी जाएगी। मोतीपुर चीनी मिल के पुनरुद्धार और नए उद्योगों की स्थापना से मुजफ्फरपुर सहित इसके पड़ोसी जिलों के लाखों गन्ना किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।
इस प्रशासनिक सक्रियता से स्थानीय किसानों और आम जनता में बंद पड़ी चीनी मिल के दोबारा शुरू होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। यह परियोजना न केवल गन्ना किसानों के जीवन में सुधार लाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य को भी बदल देगी।
266 एकड़ जमीन वापसी की प्रक्रिया शुरू
मोतीपुर चीनी मिल की जमीन के वास्तविक सीमांकन और हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मुजफ्फरपुर के अपर समाहर्ता (राजस्व) प्रशांत कुमार ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अपर समाहर्ता ने जिले के सात अलग-अलग अंचलों से 17 कुशल अमीनों की विशेष प्रतिनियुक्ति मोतीपुर अंचल में की है। इन सभी अमीनों को सोमवार, 20 जुलाई से ही योजना स्थल पर पहुंचकर संयुक्त रूप से जमीन की मापी और सीमांकन का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
यह पूरी मापी प्रक्रिया मोतीपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) तरुण कुमार की सीधी निगरानी और मॉनिटरिंग में चलाई जा रही है। अपर समाहर्ता प्रशांत कुमार ने सख्त हिदायत दी है कि सभी प्रतिनियुक्त अमीन अगले तीन दिनों के भीतर, यानी निर्धारित समय सीमा में पूरी जमीन का सटीक मापन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मोतीपुर सीओ को सौंपेंगे।
किस मौजे में कितनी जमीन?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, कुल 266.66 एकड़ लीज की जमीन विभिन्न राजस्व ग्रामों (मौजों) के अंतर्गत आती है, जिसका मापन तीन दिनों तक लगातार चलेगा।
| मौजा का नाम | जमीन का रकबा (एकड़ में) |
|---|---|
| मोतीपुर | 96.37 |
| बखरा | 28.58 |
| बरियारपुर | 114.57 |
| सुंदर सराय | 19.14 |
| पचरुखी | 8.00 |
इन सभी मौजों में सीमांकन के लिए मोतीपुर के अलावा कुढ़नी, कांटी, पारू, साहेबगंज, मड़वन और सरैया अंचल से अमीनों को बुलाया गया है। यह जमीन वापसी क्षेत्र के औद्योगिक विकास और किसानों की समृद्धि के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
गन्ना किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि ‘इस जमीन को आईपीएल से वापस लेकर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा दी जाएगी। मोतीपुर चीनी मिल के पुनरुद्धार और नए उद्योगों की स्थापना से मुजफ्फरपुर सहित इसके पड़ोसी जिलों के लाखों गन्ना किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।’
अंचल कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट को इसी सप्ताह के अंत तक जिलाधिकारी (डीएम) के माध्यम से राज्य के गन्ना उद्योग विभाग को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। इस प्रशासनिक सक्रियता से स्थानीय किसानों और आम जनता में मोतीपुर चीनी मिल के दोबारा शुरू होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं, जिससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।









