Bihar Expressway: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना बिहार में तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी बिहार एक्सप्रेसवे का काम जल्द ही गति पकड़ेगा, क्योंकि पूर्वी चंपारण जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रभावित जमीन मालिकों को जल्द ही मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जिससे परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ होगा।
पूर्वी चंपारण में जमीन अधिग्रहण का अंतिम चरण
पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने सभी अंचल अधिकारियों (CO) को एक महीने के भीतर खेसरा पंजी तैयार कर जिला मुख्यालय को सौंपने का निर्देश दिया है। यह कदम जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए उठाया गया है। परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन का मूल्य तय करने का काम पूरा हो चुका है। इसके लिए गठित पांच सदस्यीय टीम ने अपना सर्वे भी पूरा कर लिया है। अब जमीन का डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जो अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।






अधिकारियों के मुताबिक, खेसरा पंजी तैयार होने के बाद जमीन मालिकों की पहचान की जाएगी और जमीन के रकबे का मिलान होगा। यदि कोई आपत्ति आती है, तो उसका निपटारा किया जाएगा। ये सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जमीन मालिकों को मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा।

बिहार के 8 जिलों को जोड़ेगा यह एक्सप्रेसवे
यह 520 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बिहार के आठ प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे राज्य के बड़े हिस्से को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा। इसके निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हाईस्पीड सड़क पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे जिन 8 जिलों से होकर गुजरेगा, वे हैं:
- पश्चिम चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- शिवहर
- सीतामढ़ी
- मधुबनी
- सुपौल
- अररिया
- किशनगंज
यह परियोजना राज्य के 39 प्रखंडों और 313 गांवों को सीधे तौर पर जोड़ेगी। पूर्वी चंपारण जिले में एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 70 किलोमीटर होगी। यह सड़क जिले के 8 अंचलों के 56 राजस्व गांवों से होकर शिवहर जिले में प्रवेश करेगी। रूट के अनुसार, एक्सप्रेसवे सबसे पहले पहाड़पुर अंचल से जिले में दाखिल होगा।
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से मिलेगा तेज विकास
यह पूरी परियोजना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित की जा रही है। इसका मतलब है कि इसका रूट घनी आबादी वाले इलाकों से अलग होगा, जिससे जमीन अधिग्रहण में कम दिक्कतें आएंगी और निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा होने की उम्मीद है। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की दूरी 520 किलोमीटर रह जाएगी। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के बीच सड़क संपर्क पहले से कहीं ज्यादा तेज और बेहतर होगा।
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों कम होंगे। एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस, औद्योगिक कॉरिडोर और कमर्शियल हब विकसित होने की भी प्रबल संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पूर्वी चंपारण के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी कुमार विमल कांत ने बताया, ‘भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सभी तकनीकी प्रक्रियाएं तय समय के भीतर पूरी करने की कोशिश की जा रही है। खेसरा पंजी तैयार होते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।’
यह परियोजना बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों को नई गति मिलेगी।









