Bihar Sanskrit Research: बिहार की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और इंग्लैंड स्थित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत सहयोग के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह ऐतिहासिक करार बिहार की बौद्धिक संपदा को नया जीवन देगा और उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।
बिहार को मिली बड़ी सौगात! ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ेगा दरभंगा का संस्कृत संस्थान, बदल जाएगी मिथिला की तकदीर
Bihar Sanskrit Research: बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अब वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलने जा रही है। बिहार सरकार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और इंग्लैंड की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच एक महत्वपूर्ण संस्थागत सहयोग प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने इस ऐतिहासिक पहल को मिथिला और ऑक्सफोर्ड के बीच ज्ञान की एक नई साझेदारी बताया है।







उच्च शिक्षा विभाग ने दी हरी झंडी, सीएम सम्राट चौधरी ने दिए थे निर्देश
संजय झा ने बताया कि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के साथ संस्थागत सहयोग के लिए ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से प्राप्त प्रस्ताव का स्वागत करते हुए अपनी औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। उनके अनुसार, यह निर्णय बिहार की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


सांसद संजय झा ने पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर इस संस्थागत करार का अनुरोध किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री को करार के महत्व की विस्तृत जानकारी देते हुए ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से प्राप्त औपचारिक प्रस्ताव की प्रति भी सौंपी थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उसी समय प्रस्ताव की सराहना करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण और वैश्विक शोध को बढ़ावा
संजय झा ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थागत करार मिथिला समेत पूरे बिहार की बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा में संरक्षित हजारों प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण, डिजिटलीकरण, शोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समालोचनात्मक संस्करणों का प्रकाशन संभव हो पाएगा। इसके साथ ही, संस्थान को एक बार फिर ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, और बिहार के शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, फेलोशिप तथा प्रशिक्षण से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को भी मिलेगी मजबूती
सांसद संजय झा ने यह भी बताया कि यह करार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। उनका कहना है कि इस पहल से भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण के साथ-साथ उसके वैश्विक प्रसार को भी गति मिलेगी।
जनवरी 2025 में ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के अनुरूप, फरवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के जीर्णोद्धार और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत वर्तमान में कार्य जारी है।
यह ऐतिहासिक सहयोग बिहार की प्राचीन बौद्धिक संपदा को आधुनिक तकनीक और वैश्विक विद्वत्ता से जोड़कर उसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके।
मिथिला की विरासत को ऑक्सफोर्ड का साथ
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने इस पहल को मिथिला और ऑक्सफोर्ड के बीच ज्ञान की एक ऐतिहासिक साझेदारी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से मिले प्रस्ताव का स्वागत करते हुए औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। संजय झा के अनुसार, यह फैसला बिहार की समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संजय झा ने कहा, ‘बिहार सरकार ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा और इंग्लैंड स्थित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत सहयोग के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला बिहार की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल से मिली गति
संजय झा ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई को पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी के बीच संस्थागत करार का अनुरोध किया। संजय झा ने मुख्यमंत्री को करार के महत्व की विस्तृत जानकारी दी और ऑक्सफोर्ड संस्कृत टेक्स्ट सोसाइटी से प्राप्त औपचारिक प्रस्ताव की प्रति भी सौंपी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रस्ताव की सराहना करते हुए तुरंत उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।
दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा संरक्षण और शोध
इस अंतरराष्ट्रीय संस्थागत करार से मिथिला समेत पूरे बिहार की बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की उम्मीद है। संजय झा ने विश्वास जताया कि इससे दरभंगा स्थित मिथिला संस्कृत शोध संस्थान में संरक्षित हजारों प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों का वैज्ञानिक सूचीकरण, डिजिटलीकरण और शोध हो सकेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन पांडुलिपियों के समालोचनात्मक संस्करणों का प्रकाशन भी संभव हो पाएगा।
इस पहल से संस्थान को ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, बिहार के शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, फेलोशिप और प्रशिक्षण से जुड़ने के नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी शोध क्षमताओं का विकास होगा।
‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को मिलेगी नई मजबूती
संजय झा ने इस करार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के लिए भी एक नई मजबूती बताया। उनके अनुसार, यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण एवं वैश्विक प्रसार को गति प्रदान करेगी, जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को दुनिया भर में फैलाने में सहायक होगी।
संस्थान के जीर्णोद्धार का कार्य पहले से ही जारी है। इससे पहले, जनवरी 2025 में हुई ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की थी, जिसके अनुरूप फरवरी 2025 में राज्य मंत्रिमंडल ने मिथिला संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा के जीर्णोद्धार और पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत वर्तमान में कार्य प्रगति पर है, जो इस नए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।










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