Bihar Assembly: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में 13 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इन विधेयकों के माध्यम से राज्य की कानून-व्यवस्था, उच्च शिक्षा, शहरी विकास, वित्तीय प्रशासन और स्थानीय शासन सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़े विधायी परिवर्तन किए गए हैं। सरकार का यह कदम राज्य के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करेगा और आम जनता के जीवन पर सीधा असर डालेगा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक राहुल शर्मा द्वारा विधेयकों को प्रवर समिति को भेजने के प्रस्ताव और एआईएमआईएम (AIMIM) विधायक अख्तरुल ईमान द्वारा लाए गए संशोधन प्रस्तावों को बहुमत से खारिज कर दिया गया।
उच्च शिक्षा में सुधार पर सरकार का बड़ा कदम
बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। उनका उद्देश्य है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई छात्र स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बिहार के बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे हर साल हजारों करोड़ रुपये का बहिर्प्रवाह होता है।






संशोधित कानून के तहत, प्रायोजक निकायों को एक शैक्षणिक सत्र के लिए निजी विश्वविद्यालय संचालित करने की अस्थायी अनुमति मिल सकती है, बशर्ते वे भवनों, बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता का लिखित आश्वासन दें। यदि निर्धारित अवधि के भीतर निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं किया जाता है, तो यह अनुमति स्वतः समाप्त हो जाएगी।

अपराध नियंत्रण कानून का दायरा बढ़ा, सोशल मीडिया पर भी सख्ती
विधानसभा ने बिहार अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के माध्यम से अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) के दायरे का विस्तार किया गया है, जिसमें अब संगठित अपराध, भूमि माफिया गतिविधियों, पेपर लीक गिरोहों, विस्फोटकों से जुड़े अपराधों, सार्वजनिक संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने और वन संसाधनों की तस्करी जैसे मामले भी शामिल होंगे।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन को बताया कि संशोधित कानून में उन व्यक्तियों के लिए छह महीने से एक साल तक की कैद का भी प्रावधान है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते हैं, मौखिक दुर्व्यवहार करते हैं या अपमानजनक टिप्पणी करते हैं।
स्टाम्प शुल्क चोरी पर लगेगी लगाम, लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई
विधानसभा ने भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक भी पारित किया, जिसमें पंजीकरण के दौरान संपत्ति के मूल्यांकन में कमी करने पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। मंत्री मदन सहनी ने बताया कि संपत्ति के वास्तविक मूल्य को छिपाकर स्टाम्प शुल्क भुगतान को कम करने वाले व्यक्तियों पर बकाया राशि के बराबर वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पंजीकरण अधिकारियों को बाजार मूल्यों को सत्यापित करने के लिए अधिकृत किया गया है, और लापरवाह पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू करने के प्रावधान किए गए हैं।
अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी हुए पारित
विधानसभा द्वारा पारित किए गए अन्य प्रमुख विधेयकों में शामिल हैं:
- शहीद जुब्बा सहनी स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड सिविल इंजीनियरिंग विधेयक
- बिहार इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड कंप्यूटर साइंस विधेयक
- बिहार जेल और सुधार सेवा विधेयक
- बिहार दुकानें और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा शर्तें) निरसन विधेयक
- पंजीकरण (बिहार संशोधन) विधेयक
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक
- बिहार राज्य पंचायत (संशोधन) विधेयक
- बिहार विशेषीकृत विश्वविद्यालय विधेयक
इन विधायी परिवर्तनों का उद्देश्य राज्य के शासन और विकास को नई दिशा देना है। इन विधेयकों के लागू होने से बिहार में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, व्यापार और वित्तीय पारदर्शिता में महत्वपूर्ण सुधार आने की उम्मीद है, जिससे राज्य के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।









