Bihar Assistant Professor Recruitment: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बिहार में एक बड़ी खुशखबरी आई है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नियमित सहायक प्रोफेसरों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की बड़े पैमाने पर भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश कुमार चौधरी ने पुष्टि की है कि नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया सितंबर महीने से प्रारंभ की जाएगी।
सितंबर से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया, हजारों को मिलेगा मौका
इस भर्ती अभियान के माध्यम से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरा जाएगा। शिक्षा विभाग से रिक्तियों का विस्तृत विवरण प्राप्त होते ही, आयोग अगले महीने यानी सितंबर में विज्ञापन जारी करने और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालयों में 7000 से अधिक स्थायी सहायक प्रोफेसर पदों पर भर्ती होने की संभावना है, जबकि कुछ स्रोतों में यह संख्या 9000 से अधिक बताई जा रही है। यह पहल राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।






पारदर्शी चयन के लिए नया परीक्षा पैटर्न, इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग
नियमित भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया परीक्षा पैटर्न अपनाया जाएगा। चयन कुल 200 अंकों के आधार पर होगा, जिसमें 175 अंकों की तीन घंटे की लिखित परीक्षा और 25 अंकों का साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल है। इंटरव्यू में शिक्षण प्रदर्शन (टीचिंग डेमो) और बोर्ड के साथ संवाद को विशेष महत्व दिया जाएगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। यह भर्ती हाल ही में 211 नए डिग्री कॉलेजों के लिए हुई संविदा आधारित भर्ती से अलग है, जिसके परिणाम जारी हो चुके हैं और जॉइनिंग प्रक्रिया अभी चल रही है। नियमित पदों पर स्थायी नियुक्ति की यह बड़ी कवायद सितंबर से शुरू होगी।
आयोग अध्यक्ष गिरीश कुमार चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार रिक्त पदों का रोस्टर तैयार कर चुकी है और आयोग भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है, जिससे योग्य युवाओं को सरकारी नौकरी का सुनहरा अवसर मिलेगा।
यह पहल न केवल बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि हजारों युवाओं के लिए सम्मानजनक करियर का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।








