Bihar Highway: पटना हाईकोर्ट ने बिहार में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण की मौजूदा स्थिति पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने दोनों प्राधिकरणों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों की जानकारी मिल सके।
कोर्ट ने क्यों मांगा जवाब?
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ एक अधिवक्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में बिहार के प्रमुख राजमार्गों पर पेड़ों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि बिहार में कुल 6,147 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य के 38 राज्य राजमार्गों पर 2,515 किलोमीटर सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्गों में अपग्रेड किया जा रहा है।






अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि NHAI 3,189 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव करता है, जबकि शेष 2,589 किलोमीटर की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इनमें से कई राजमार्गों पर सड़क किनारे पेड़ नहीं हैं, जो बढ़ते vehicular यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल देता है।
एनएचएआई और राज्य सरकार का पक्ष
NHAI की ओर से अधिवक्ता मौर्य विजय चंद्र ने अदालत को सूचित किया कि प्राधिकरण ने बिहार में कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर वृक्षारोपण का काम पहले ही शुरू कर दिया है और यह कार्य प्रगति पर है। वहीं, बिहार सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रभाकर झा ने अदालत को बताया कि राज्य के वन विभाग ने पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे वृक्षारोपण के संबंध में NHAI को कई बार पत्र लिखा है। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार, NHAI ने अभी तक इन संचारों का कोई जवाब नहीं दिया है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने NHAI और राज्य सरकार दोनों को निर्देश दिया है कि वे बिहार के राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए उठाए गए कदमों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत विवरण देते हुए एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
अदालत का यह निर्देश सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अगले दो सप्ताह में प्रस्तुत होने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि सरकार और NHAI इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं, और भविष्य में बिहार के बिहार हाईवे कितने हरे-भरे होंगे।








