Patna IGIMS News: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS), पटना ने 2025 की एमबीबीएस सेकंड प्रोफेशनल परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छह छात्रों को निलंबित कर दिया है। इन अनियमितताओं में प्रश्न पत्र लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर के आरोप शामिल हैं। संस्थान के छात्र अनुशासनात्मक समिति की सिफारिश के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसने परीक्षा विवाद की आंतरिक जांच की थी।
निलंबित छात्रों की सूची और कार्रवाई
प्रिंसिपल डॉ. रंजीत गुहा द्वारा 3 अगस्त को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए छात्र निम्नलिखित हैं:






- अभिजीत कुमार (2022 बैच)
- अंकित चंद्र (2022 बैच)
- यश राज सिन्हा (2022 बैच)
- अमित कुमार (2023 बैच)
- अविनाश प्रकाश (2023 बैच)
- सुमित कुमार (2023 बैच)
इन छात्रों को चार सप्ताह के लिए कॉलेज और छात्रावास परिसर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। संस्थान ने यह भी निर्णय लिया है कि वे भविष्य की परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल करने पर भी शैक्षणिक और मानद विशिष्टताओं, जैसे पदक और अन्य पुरस्कारों के लिए अपात्र रहेंगे।
जांच समिति की रिपोर्ट और धांधली के खुलासे
यह अनुशासनात्मक कार्रवाई डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विभूति प्रसन्ना सिन्हा, डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन और रजिस्ट्रार सर्वेश कुमार की समिति की जांच के निष्कर्षों पर आधारित है। जांच के अनुसार, परीक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों और फार्माकोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी विभागों के एक-एक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि एक कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की गई है, लेकिन औपचारिक कार्रवाई पूरी होने तक उस व्यक्ति की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है।
पूरे मामले की टाइमलाइन और उठते सवाल
यह विवाद 11 मार्च को तब सामने आया, जब IGIMS, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और बिहार स्वास्थ्य विभाग को एक अज्ञात ईमेल भेजा गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रश्न पत्र लीक हो गया था और उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली की गई थी, साथ ही वीडियो और अन्य सहायक सामग्री भी संलग्न थी। शिकायत के बाद, 12 अप्रैल को डीन (परीक्षाएं) डॉ. प्रकाश दुबे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। आरोपों का प्रथम दृष्टया समर्थन करने वाले सबूत मिलने के बाद समिति ने आगे की कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद डॉ. दुबे ने डीन (परीक्षाएं) के पद से इस्तीफा दे दिया और प्रोफेसर नीरू गोयल ने यह भूमिका संभाली। विस्तृत जांच के लिए 5 मई को तीन अतिरिक्त समितियां बनाई गईं।
जांच समिति ने 27 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की पुष्टि हुई। निष्कर्षों के अनुसार, कई उत्तर पुस्तिकाओं के पहले और अंतिम पृष्ठों पर हस्ताक्षर मेल खाते थे, जबकि मध्यवर्ती पृष्ठों पर हस्ताक्षर भिन्न थे, जिससे संभावित हेरफेर पर चिंताएँ बढ़ गईं। यह परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित एमबीबीएस सेकंड प्रोफेशनल परीक्षा थी, जिसमें लगभग 130 छात्र शामिल हुए थे।
परीक्षा में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बावजूद, कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही कोई विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। संस्थान की प्रतिक्रिया के कई पहलुओं पर सवाल भी उठाए गए हैं। जहां परीक्षा विभाग के तीन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, वहीं केवल एक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इसी तरह, सात छात्रों को नोटिस दिए गए थे, लेकिन केवल छह को निलंबित किया गया है, सातवें छात्र के बारे में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर होने और नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा जांच और की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगने के बाद संस्थान ने अनुशासनात्मक कार्यवाही में तेजी लाई।
इस मामले में आगे की जांच और विभागीय कार्रवाई जारी है, जिससे बिहार में मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे प्रकरण में और स्पष्टता आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।








