Bihar Mid Day Meal: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अरवल जिले के करीब 75 विद्यालयों में छात्रों को परोसे गए भोजन में कीड़े पाए गए, जिसके बाद हड़कंप मच गया। कई स्कूलों में बच्चों ने यह खाना खाने से इनकार कर दिया और अपनी प्लेटों में रखा भोजन फेंक दिया। इस चौंकाने वाली घटना के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।
कैसे परोसा गया कीड़े वाला खाना?
अरवल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी। भोजन बांटते समय ही कई छात्रों ने अपनी थाली में कीड़े देखे। बच्चों ने तुरंत शिक्षकों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद आनन-फानन में कई विद्यालयों में भोजन का वितरण रोक दिया गया। घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें बच्चे खाने में कीड़े दिखाते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ जगहों पर तो बच्चों ने सीधे कूड़ेदान में खाना फेंक दिया।
राजद ने साधा सरकार पर निशाना
इस घटना के सामने आने के बाद बिहार में सियासत भी गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना का वीडियो साझा करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राष्ट्रीय जनता दल ने अपने पोस्ट में लिखा है, “बिहार के सरकारी स्कूलों के मध्याह्न भोजन में कीड़े पाया जाना बिल्कुल आम सी बात है! BJP JDU सरकार बिहार के विद्यालयों के लिए अच्छी शिक्षा, बेहतर पाठयक्रम, भवन, पर्याप्त शिक्षक, पर्याप्त कक्षाएं, शुद्ध पोषक भोजन… कुछ भी सुनिश्चित नहीं कर सकती है! बिहार की शिक्षा व्यवस्था केवल मंत्री, मुख्यमंत्री की अनर्गल बयानबाजी तक ही सीमित है!”
राजद ने इस घटना को बिहार की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का प्रमाण बताया है।
जांच के दायरे में मिड-डे मील की पूरी प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, अरवल सदर प्रखंड के लगभग 75 स्कूलों में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से मिड-डे मील पहुंचाया जाता है। मंगलवार को भी इसी व्यवस्था के तहत भोजन विद्यालयों तक भेजा गया था। भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूचित किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि भोजन में कीड़े किस स्तर पर पहुंचे और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच दल भोजन तैयार करने से लेकर उसकी पैकिंग, भंडारण और स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की गहनता से पड़ताल करेगा। साथ ही, भोजन की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।
नालंदा की घटना से सबक नहीं?
अरवल की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब नालंदा के नूरसराय प्रखंड स्थित परासी मध्य विद्यालय में मिड-डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर इस्तेमाल किए जाने का मामला अभी ताजा है। उस घटना में भोजन खाने के बाद 18 से 36 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
हालांकि, अरवल की घटना में अभी तक किसी बच्चे के बीमार होने की पुष्टि नहीं हुई है, क्योंकि अधिकांश बच्चों ने कीड़े देखकर खाना नहीं खाया। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा विभाग की यह जांच न केवल अरवल की घटना के दोषियों को सामने लाएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उम्मीद है कि इस जांच के बाद मिड-डे मील वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।








