Sitamarhi News: बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सोमवार रात सीतामढ़ी सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखी। सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के आवास पर एक समारोह से लौटते समय अचानक मंत्री का काफिला अस्पताल पहुंच गया। इस अप्रत्याशित दौरे से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप
मंत्री के अचानक अस्पताल पहुंचने की कोई पूर्व सूचना नहीं थी, जिससे अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मी सकते में आ गए। निशांत कुमार ने केवल औपचारिक निरीक्षण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने अलग-अलग वार्डों का गहन जायजा लिया। उन्होंने मरीजों से सीधे बातचीत की और उनसे पूछा कि क्या उन्हें समय पर डॉक्टर मिल रहे हैं, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, और इलाज के दौरान किसी परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ रहा।
मरीजों और उनके परिजनों ने मंत्री से पेयजल की कमी, एम्बुलेंस की अनुपलब्धता, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी, खराब साफ-सफाई और बिना पर्याप्त इलाज के मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने जैसी कई गंभीर शिकायतें कीं।
डॉक्टरों की गैरहाजिरी और रेफर करने पर नाराजगी
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कई चिकित्सक अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित थे। मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि डॉक्टरों की उपलब्धता और उनकी ड्यूटी रोस्टर को लेकर अक्सर समस्या रहती है, जिससे गंभीर मरीजों के लिए स्थिति और भी मुश्किल हो जाती है। एक परिजन ने इमरजेंसी वार्ड में शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि कई बार मरीजों को उचित इलाज दिए बिना ही बाहर रेफर कर दिया जाता है, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी और फटकार
अस्पताल में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होने की शिकायत पर मंत्री ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। एम्बुलेंस की सुविधा को लेकर भी मरीजों के परिजनों ने अपनी परेशानी बताई, क्योंकि जरूरत के समय एम्बुलेंस आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती। वार्डों में बेड पर चादरों की कमी, साफ-सफाई की खराब स्थिति और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में खामियां भी मंत्री की नजर से नहीं बच सकीं। इन अव्यवस्थाओं को देखकर मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
सदर अस्पताल के बाद, स्वास्थ्य मंत्री ने गुदड़ी रोड स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल का भी निरीक्षण किया, जहां की स्थिति भी असंतोषजनक पाई गई। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री का यह औचक निरीक्षण केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। यह दौरा इस बात का संकेत है कि अब अस्पतालों में कागजी रिपोर्टों के बजाय वास्तविक स्थिति की सीधे मौके पर जाकर जांच की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।







