Patna News: त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले पटना में आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें आम लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। चीनी, प्याज और आटे जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं के दाम बिहार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा निर्धारित दरों से काफी अधिक हो गए हैं। 20 अगस्त को जारी विभाग की दरों और बाजार में मौजूदा कीमतों के बीच एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
सरकारी दरें बनाम बाजार की हकीकत
बिहार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार, चीनी का थोक मूल्य 54 रुपये प्रति किलोग्राम, प्याज का 33 रुपये और आटे का 30 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। वहीं, इन वस्तुओं के खुदरा मूल्य क्रमशः 57 रुपये, 41 रुपये और 34 रुपये प्रति किलोग्राम तय किए गए हैं। हालांकि, बाजार में स्थिति बिल्कुल अलग है।
| वस्तु | सरकारी थोक दर (रु./किलो) | सरकारी खुदरा दर (रु./किलो) | बाजार थोक दर (रु./किलो) | बाजार खुदरा दर (रु./किलो) | सरकारी खुदरा दर से अंतर (रु./किलो) |
|---|---|---|---|---|---|
| चीनी | 54 | 57 | 64 | 70-72 | 13-15 |
| प्याज | 33 | 41 | 44 | 55-60 | 14-19 |
| आटा | 30 | 34 | 40-42 | 50-52 | 16-18 |
थोक बाजार में चीनी लगभग 64 रुपये प्रति किलोग्राम, प्याज 44 रुपये और आटा 40-42 रुपये में बिक रहा है। खुदरा बाजार में ये कीमतें और भी अधिक हैं। चीनी 70-72 रुपये प्रति किलोग्राम, प्याज 55-60 रुपये और आटा 50-52 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। इस हिसाब से, चीनी सरकारी खुदरा दर से 13-15 रुपये अधिक, प्याज 14-19 रुपये अधिक और आटा 16-18 रुपये अधिक महंगा मिल रहा है। थोक बाजार में भी चीनी लगभग 10 रुपये, प्याज 11 रुपये और आटा 10-12 रुपये सरकारी दर से ऊपर बिक रहा है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी, आटा और प्याज जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतें उपभोक्ताओं के मासिक खर्च को और बढ़ा रही हैं। यह स्थिति उन परिवारों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो पहले से ही सीमित बजट में अपना गुजारा कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई के कारण त्योहारों की खुशियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
खुदरा विक्रेता संघ के महासचिव रमेश तलरेजा ने इस संबंध में अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, "थोक कीमतें पहले से ही अधिक हैं, जिसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।" उन्होंने बाजार की कीमतों और आपूर्ति की स्थिति की करीब से निगरानी करने का आग्रह किया, ताकि अनावश्यक मूल्य वृद्धि को रोका जा सके और उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
इस स्थिति को देखते हुए, सरकार और संबंधित विभागों को बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि जल्द ही कीमतों में स्थिरता आएगी और त्योहारों का जश्न बिना किसी आर्थिक बोझ के मना पाएंगे।







