Bihar Class 9 Books: बिहार में सीबीएसई की नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को नए सिलेबस की सभी किताबें समय पर नहीं मिल पाई हैं। सत्र का आधा समय बीत चुका है और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी समाप्त हो गई हैं, लेकिन विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तकों का इंतजार अब भी बना हुआ है। गणित की किताब का दूसरा भाग विद्यार्थियों को हाल ही में मिला है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्कूल अब ब्रिज कोर्स तैयार कर रहे हैं, ताकि पढ़ाई में रह गई कमी को पूरा किया जा सके और अगले साल दसवीं कक्षा में जाने वाले विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित न हो।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर असर, स्कूल बना रहे ब्रिज कोर्स
सीबीएसई और एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव किया था, जिसके बाद विद्यार्थियों को नई पुस्तकों की जरूरत थी। लेकिन नए सत्र में सभी प्रमुख विषयों की किताबें एक साथ उपलब्ध नहीं हो सकीं। कुछ विषयों की पुस्तकें जुलाई और अगस्त में भेजी गई थीं, फिर भी विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की नई किताबें पूरी तरह से नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में लगातार परेशानी आ रही है।अर्द्धवार्षिक परीक्षा समाप्त होने के बाद गणित विषय की भाग-2 पुस्तक विद्यार्थियों को मिली है, लेकिन विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पूरी नई पुस्तकों की कमी अब भी बरकरार है। इस स्थिति में बिहार के लाखों विद्यार्थियों को उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूलों के सामने भी नए पाठ्यक्रम को समय पर पूरा कराने की चुनौती बढ़ गई है।
विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों का इंतजार, अभिभावक परेशान
नौवीं के बाद विद्यार्थियों को दसवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा की तैयारी करनी होती है, जो उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मौजूदा सत्र में पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने का सीधा असर उनकी आगे की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है। इसी समस्या को देखते हुए स्कूल ब्रिज कोर्स तैयार कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पढ़ाई के दौरान छूटे हिस्सों को पूरा करना और विद्यार्थियों को अगले शैक्षणिक स्तर, विशेषकर बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार करना है।
विभिन्न निजी स्कूलों के निदेशकों ने बताया है कि नई पुस्तकों की कमी के कारण कुछ स्कूलों को पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाना पड़ रहा है, वहीं कुछ जगह निजी प्रकाशकों की किताबों का सहारा लिया जा रहा है। इससे पढ़ाई में एकरूपता बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। नए सिलेबस के अनुसार पढ़ाई कराने के लिए स्कूलों को उपलब्ध पुस्तकों और दूसरी शिक्षण सामग्री के बीच तालमेल बिठाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
किताबें उपलब्ध नहीं होने की समस्या को लेकर कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने सीबीएसई को ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। दी गई जानकारी के अनुसार, सीबीएसई के काउंसलिंग सेल में नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के प्रतिदिन करीब 40 से 50 फोन आ रहे हैं, जो उनकी गंभीर चिंता को दर्शाता है।
बिहार और पटना के लाखों विद्यार्थियों पर सीधा असर
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.5 लाख से 2 लाख के बीच बताई गई है। हालांकि, यह संख्या केवल सीबीएसई के विद्यार्थियों की है या सभी बोर्ड के छात्रों की, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। पटना जिले में सीबीएसई के 100 से अधिक प्रमुख स्कूलों में नौवीं कक्षा के करीब 35 हजार विद्यार्थी नामांकित बताए गए हैं। ऐसे में पटना और बिहार में किताबों की उपलब्धता का मुद्दा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
नए सत्र के चार से पांच महीने बीत जाने के बाद भी सभी विषयों की नई किताबें उपलब्ध नहीं होने से पढ़ाई की योजना बुरी तरह प्रभावित हुई है। जुलाई और अगस्त में कुछ पुस्तकें मिलने के बावजूद विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों की कमी बनी हुई है। अब स्कूल ब्रिज कोर्स के जरिये इस अंतर को पूरा करने की तैयारी कर रहे हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई कितनी प्रभावित हुई है और ब्रिज कोर्स से कितनी कमी पूरी हो पाएगी, यह उसके संचालन और बाकी पुस्तकों की उपलब्धता पर ही निर्भर करेगा।







