Bihar Government Officials: बिहार में सरकारी अधिकारियों के व्यवहार से परेशान आम लोगों के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने एक बड़ी पहल की है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने एक WhatsApp नंबर जारी किया है, जिस पर नागरिक सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के कथित अमानवीय व्यवहार से जुड़े फोटो, वीडियो और दस्तावेज भेज सकते हैं। सांसद ने स्पष्ट किया कि इन सभी सबूतों को इकट्ठा कर वह सरकार के सामने रखेंगे और सदन में भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे।
सुधाकर सिंह ने यह जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे संपर्क साधा। इन लोगों ने विशेष रूप से जिलों में डीएम (जिलाधिकारी) और एसपी (पुलिस अधीक्षक) के कार्यालयों में आम जनता के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं।
आखिर क्यों जारी करना पड़ा WhatsApp नंबर?
सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, कई नागरिकों ने उनसे शिकायत की कि सरकारी कार्यालयों में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। उन्होंने खास तौर पर डीएम और एसपी जैसे शीर्ष अधिकारियों के कार्यालयों का जिक्र किया, जहां लोगों को अधिकारियों से मिलने और अपनी बात रखने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं शिकायतों को सामने लाने और उन पर कार्रवाई कराने के उद्देश्य से उन्होंने WhatsApp नंबर 9220599393 जारी किया है। उन्होंने सभी से अपील की है कि वे संबंधित फोटो, वीडियो और दस्तावेज इस नंबर पर साझा करें, ताकि इन्हें संकलित कर सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
डीएम-एसपी के व्यवहार की तुलना ‘अंग्रेजी हुकूमत’ से
अपनी पोस्ट में सुधाकर सिंह ने डीएम और एसपी के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी आम लोगों से एक निश्चित दूरी बनाकर बात करते हैं, और उनके आसपास हमेशा बंदूकधारी सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। सांसद ने इस तरह के व्यवहार को ‘अंग्रेजी हुकूमत’ की याद दिलाने वाला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि डीएम और एसपी जनता के सेवक हैं और उनसे लोगों के प्रति संवेदनशीलता व सम्मान की अपेक्षा की जाती है। सांसद ने इस बात पर बल दिया कि आम लोगों के साथ होने वाले व्यवहार को गंभीरता से देखने और सुधारने की आवश्यकता है।
मानहानि नोटिस के बाद मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ समय पहले सुधाकर सिंह ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक खुला पत्र लिखा था। उस पत्र में सांसद ने नोटिस में मांगे गए पांच करोड़ रुपये के हर्जाने पर सवाल उठाए थे और यह भी पूछा था कि क्या इस मामले में राज्य सरकार से अनुमति ली गई थी। सुधाकर सिंह के अनुसार, उन्होंने भारत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की एक घटना को लेकर जनहित में सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्हें अधिवक्ता के माध्यम से यह नोटिस भेजा गया था। नोटिस में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई थी। अब सुधाकर सिंह ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों के व्यवहार का मुद्दा उठाकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत की है।






