Bihar Medical Negligence: बिहार की राजधानी पटना में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां डिलीवरी के कुछ ही घंटों बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीएओ) राजलक्ष्मी की मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद उनके नवजात बेटे के सिर से मां का साया उठ गया है। राजलक्ष्मी के परिजनों ने शेखपुरा स्थित निजी अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जिससे पूरे परिवार में गहरा सदमा है।
बेटे को जन्म देने के बाद क्यों हुई बीएओ की मौत?
राजलक्ष्मी पटना सिटी में बीएओ के पद पर तैनात थीं। बीते सोमवार (12 अक्टूबर) को उन्होंने एक निजी अस्पताल में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी कुछ ही पलों में मातम में बदल गई। राजलक्ष्मी ने बेटे को जन्म देने के कुछ घंटे बाद ही अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनके पिता कृष्ण कुमार लाल ने बताया कि उनकी बेटी की शादी साल 2024 में धूमधाम से हुई थी और उनका सरकारी अधिकारी के तौर पर एक लंबा करियर था।
कृष्ण कुमार लाल ने आरोप लगाया, ‘राजलक्ष्मी का ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टर ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया और घर चली गई। प्रसव के बाद मेरी बेटी को दिक्कत होने लगी, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने ठीक से ध्यान नहीं दिया। डॉक्टर को सूचना दी गई, पर वह बहुत देर से आई। सोमवार देर रात राजलक्ष्मी ने दम तोड़ दिया।’
निजी अस्पताल में सुविधाओं की कमी और लापरवाही के आरोप
पिता कृष्ण कुमार लाल का आरोप है कि अस्पताल में आपातकालीन इलाज के लिए न तो अत्याधुनिक उपकरण थे और न ही कुशल चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी बेटी की मौत अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण हुई है। इस घटना ने बिहार में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि गर्भावस्था के दौरान चेकअप के लिए जब राजलक्ष्मी अस्पताल जाती थीं, तो प्रबंधन जबरन उनसे हर जांच के लिए 5 स्टार रेटिंग करवाता था। यह बात राजलक्ष्मी की छोटी बहन ने उनकी मौत के बाद बताई। पिता का कहना है कि अगर उन्हें यह बात पहले पता होती, तो वे अस्पताल प्रबंधन की मंशा पर संदेह करते और शायद उनकी बेटी की जान बच जाती।
न्याय के लिए एफआईआर की तैयारी, शोक में विभाग
फिलहाल इस मामले में पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन परिजन सदमे से उबरने और सभी जानकारी जुटाने के बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं। कृष्ण कुमार लाल ने कहा कि वह जल्द ही ठोस सबूतों के साथ अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। राजलक्ष्मी, जो युवा कृषि प्रखंड पदाधिकारी के रूप में भी जानी जाती थीं, के निधन से उनके विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है। पटना के दीघा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।







