Darbhanga Court: दरभंगा की अदालतों ने गंभीर आपराधिक मामलों में सख्त रुख अपनाया है। जानलेवा हमला, अपहरण और शादीशुदा महिला की हत्या जैसे संगीन अपराधों के आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालतों ने अलग-अलग फैसलों में अभियुक्तों की नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इन न्यायिक फैसलों की जानकारी दी है, जिसके बाद अब इन सभी आरोपियों के पास उच्च न्यायालय जाने या आत्मसमर्पण करने का ही विकल्प बचा है। न्यायपालिका के इस कड़े रुख से अपराधियों में एक स्पष्ट संदेश गया है।
जानलेवा हमले के दो आरोपियों को नहीं मिली राहत
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा की अदालत ने कैथवार सोनपुर गाँव के गोबिंद मुखिया पर जानलेवा हमला करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सकतपुर थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 112/2026 के आरोपी नारायणपुर निवासी सुरेश मुखिया और बैजनाथ मुखिया की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि ये दोनों आरोपी 13 सितम्बर 2026 से ही दरभंगा मंडल कारा में बंद हैं। अदालत के इस निर्णय से उन्हें जेल में ही रहना होगा।
अपहरण और हत्या के मामले में भी जमानत खारिज
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने भी दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अपहरण से जुड़े एक मामले में हायाघाट थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 117/26 के आरोपी मोनू कुमार का अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया गया। मोनू कुमार समस्तीपुर जिला के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बिशनपुर गाँव के वार्ड नम्बर 10 निवासी बिनोद महतो का पुत्र है।
इसी अदालत ने शादीशुदा महिला की गला दबाकर हत्या करने के एक अन्य गंभीर मामले में भी अग्रिम जमानत आवेदन को नामंजूर कर दिया। इस मामले में सिंहबाड़ा थाना क्षेत्र के भपूरा गाँव के संतोष राम आरोपी हैं, जिन्हें अदालत से कोई राहत नहीं मिली है।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया, ‘उपरोक्त सभी आरोपियों को अब जमानत के लिए या तो पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ेगा, या संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का विकल्प है।’
दरभंगा की अदालतों के इन फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि गंभीर अपराधों में संलिप्त आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी। यह न्यायिक प्रक्रिया में सख्ती और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

















