Bihar JDU Conflict: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर पनपा विवाद अब पार्टी की अंदरूनी खींचतान का बड़ा मामला बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में मोकामा के विधायक पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मामले में अनंत सिंह को तात्कालिक नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है और उनकी पत्नी नीलम देवी से राज्य मंत्री का दर्जा भी छीन लिया गया है। नीलम देवी को 25 नवंबर तक अपना सरकारी आवास खाली करने का निर्देश मिला है। ऐसे में यह सवाल गहरा गया है कि पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान में कार्रवाई का सबसे बड़ा असर अनंत सिंह पर ही क्यों हुआ।
अनंत सिंह का विरोध और जदयू की चुप्पी
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मसले पर अनंत सिंह ने खुलकर विरोध जताया था। उनके बयान और नाराजगी लगातार सुर्खियों में रहे, लेकिन शुरुआत में जदयू ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। इस दौरान पार्टी के अनुशासन पर भी सवाल उठने लगे थे। जैसे-जैसे अनंत सिंह का विरोध बढ़ता गया, पार्टी की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनती रही। बाद में, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को सौंप दी। संजय झा ने कहा कि यह मामला ललन सिंह के संसदीय क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए वही इसे सुलझाएंगे।
संजय झा के फैसले पर उठे सवाल
संजय झा के इस फैसले पर राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े हुए। जब संजय झा स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं, तो इस महत्वपूर्ण मामले की जिम्मेदारी ललन सिंह को क्यों दी गई? इस निर्णय को लेकर यह भी अटकलें लगाई गईं कि अनंत सिंह, नीरज कुमार और ललन सिंह के बीच पहले से चल रही खींचतान बढ़ सकती है। इस पूरे विवाद में संजय झा की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई, लेकिन तत्काल प्रभाव से नुकसान केवल अनंत सिंह को उठाना पड़ा।
ललन सिंह ने 2025 के आरोपों का भी किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘उस समय लगाए गए आरोप सही पाए गए थे और मौजूदा घटनाक्रम उसी की प्रतिक्रिया है।’
ललन सिंह ने यह भी कहा कि 2025 में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से गलती हुई थी। उनके इस बयान के बाद पार्टी के संगठन और अनुशासन को लेकर चर्चा और तेज हो गई। इस तरह यह विवाद केवल अनंत सिंह के विरोध तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के नेतृत्व की भूमिका भी सार्वजनिक बहस का विषय बन गई।
जदयू के भीतर इस खींचतान में ललन सिंह और संजय झा की भूमिका पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। पार्टी के अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों पर भी बहस छिड़ी है, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा झटका मोकामा विधायक अनंत सिंह को ही लगा है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और राजनीतिक मायने सामने आ सकते हैं।

















