Bihar Arms Smuggling: बिहार में अवैध हथियार और कारतूस की बड़ी खेप पकड़ी गई है। बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भोजपुर जिले के कोईलवर चेक पोस्ट के पास एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान करीब 19 हजार कारतूस के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से एक देसी पिस्तौल, एक टाटा सफारी कार और पांच मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। यह बड़ी कार्रवाई राज्य में अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि कारतूस उत्तर प्रदेश के बदायूं से बिहार लाए जा रहे थे। इन कारतूसों को मुजफ्फरपुर, सुपौल, दरभंगा और सीवान जैसे जिलों में पहुंचाने की योजना थी। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर निवासी सारस कुमार और लल्टू कुमार, जबकि सीवान जिले के तरवारा निवासी चंदन तिवारी के रूप में हुई है। इन तीनों को भोजपुर जिले के कोईलवर थाना क्षेत्र में एसटीएफ ने दबोचा।
छापेमारी में ऐसे बिछाया गया जाल
बिहार एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से अवैध हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बिहार लाए जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर एसटीएफ ने एक विशेष टीम गठित कर निगरानी शुरू कर दी। सोमवार को भोजपुर जिला पुलिस के सहयोग से कोईलवर चेक पोस्ट के समीप घेराबंदी की गई। टीम ने संदिग्ध टाटा सफारी कार को रोककर उसमें सवार आरोपियों को दबोच लिया। कार की सघन तलाशी के दौरान विभिन्न बोर के लगभग 19 हजार कारतूस बरामद हुए। इसके साथ ही प्वाइंट 32 बोर की एक देसी पिस्तौल मैगजीन सहित मिली। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही कार और पांच मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं।
यूपी से बिहार तक फैला नेटवर्क, सीतामढ़ी से भी जुड़े तार
इस कार्रवाई का नेतृत्व एसटीएफ के डीएसपी शेख साबिर और प्रीतम कुमार कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। इससे कारतूस की खरीद, परिवहन और आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में सामने आया है कि कारतूस की यह खेप उत्तर प्रदेश के बदायूं से बिहार पहुंचाई जा रही थी, जिसके बाद इन्हें मुजफ्फरपुर, सुपौल, दरभंगा और सीवान में भेजा जाना था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन जिलों में कारतूस किसे दिए जाने थे और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े नाम सक्रिय हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई के तार सीतामढ़ी के रीगा थाना क्षेत्र में हुई एक पुरानी बरामदगी से भी जुड़ रहे हैं। सात अक्टूबर 2026 को रीगा इलाके में 777 कारतूस बरामद किए गए थे। उस मामले में एसटीएफ और सीतामढ़ी जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ हुई थी, जिसमें तीन कुख्यात अपराधी जख्मी हुए थे और उन्हें गिरफ्तार किया गया था। रीगा की कार्रवाई में तीन सेमी-ऑटोमेटिक पिस्तौल के साथ 777 कारतूस मिले थे। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने हथियारों और कारतूस की सप्लाई लाइन की जांच शुरू की थी। इसी जांच के दौरान इस अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह के नेटवर्क की जानकारी सामने आई थी। रीगा थाना में इस संबंध में कांड संख्या 384/26 दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, रीगा मामले में गिरफ्तार सुनील कुमार पर सीतामढ़ी के अलग-अलग थानों में सात मामले दर्ज हैं। मन शंकर उर्फ मणि सिंह पर पांच और इंदल कुमार उर्फ इंदल महतो पर चार मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है।
भोजपुर में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनका रीगा मामले में गिरफ्तार आरोपियों से कोई सीधा संपर्क था या नहीं। मोबाइल फोन की जांच से गिरोह के अन्य सदस्यों, हथियारों के स्रोत और कारतूस की सप्लाई से जुड़े संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सकता है। फिलहाल, एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।







