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विक्रमशिला सेतु पर बड़ा अपडेट: 14 जनवरी की डेडलाइन मिस, जानिए कब तक मिलेगी जाम से मुक्ति?

Bihar Vikramshila Setu: भागलपुर और पूर्वी बिहार की लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में देरी से लाखों यात्री परेशान हैं। तकनीकी अड़चनों और सुरक्षा मानकों के कारण अब काम पूरा होने में और वक्त लगेगा, जिससे भीषण जाम की समस्या बढ़ गई है।

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Bihar Vikramshila Setu: भागलपुर और पूर्वी बिहार की जीवनरेखा कहे जाने वाले Bihar विक्रमशिला सेतु की मरम्मत में बड़ी देरी सामने आई है। एक महीने से अधिक समय से जारी जीर्णोद्धार कार्य की निर्धारित समय सीमा, 14 जनवरी मकर संक्रांति, अब पूरी तरह से चूक गई है। पुल के चार क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने का काम अभी भी अधूरा है, जिससे लाखों यात्रियों को भीषण जाम और आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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मरम्मत की सुस्त रफ्तार: अब तक लगे सिर्फ दो गर्डर

गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के चार क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने का काम चल रहा है। योजना के अनुसार, प्रत्येक क्षतिग्रस्त हिस्से में दो-दो स्टील गर्डर लगाए जाने हैं, यानी कुल आठ गर्डर स्थापित किए जाने थे। हालांकि, अब तक की प्रगति निराशाजनक है। मरम्मत कार्य शुरू हुए एक महीने से अधिक हो गया है, लेकिन केवल दो क्षतिग्रस्त हिस्सों में ही एक-एक स्टील गर्डर लगाया जा सका है। इसका मतलब है कि कुल आठ में से अभी सिर्फ दो ही गर्डर अपनी जगह पर बैठ पाए हैं, जबकि छह गर्डर का काम अभी भी बाकी है।

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तकनीकी चुनौतियां और लंबा इंतजार

बाकी बचे क्षतिग्रस्त हिस्सों में स्टील गर्डर बैठाने का रास्ता आसान नहीं है। गर्डर लगाने से पहले पुराने बीम को काटने का जटिल और सावधानी भरा काम चल रहा है। मौके पर मौजूद इंजीनियरों और कर्मचारियों के अनुसार,

बीम कटिंग का काम पूरा होने में कम से कम दो दिन का समय और लगेगा।

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बीम हटने के बाद ही बेयरिंग सेट करने की जगह बनेगी, जिसके बाद ही भारी-भरकम नए गर्डर लॉन्च किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में, जिसमें बीम काटना, बेयरिंग बैठाना और गर्डर लॉन्च करना शामिल है, लगभग 15 दिनों का समय लगने की उम्मीद है। इसके बाद, गर्डर लॉन्चिंग पूरी होने पर स्लैब ढलाई का काम शुरू होगा। ढलाई से पहले लोहे का मजबूत जाल बांधने और चदरा बिछाने में एक महीने से अधिक का वक्त लग सकता है।

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स्लैब ढलाई के तुरंत बाद भी पुल पर यातायात शुरू नहीं किया जा सकता। ढलाई के बाद कंक्रीट को पूरी मजबूती हासिल करने के लिए सेंट्रिंग हटाने से पहले 28 दिनों का अनिवार्य तकनीकी ‘लॉक-इन’ समय होता है। इस अवधि के बाद ही विशेषज्ञों की टीम पुल की मजबूती और स्थिरता की गहन तकनीकी जांच करेगी। सुरक्षा ऑडिट में हरी झंडी मिलने के बाद ही पुल को वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाएगा।

आम जनजीवन पर गहराता संकट: जाम और परेशानी

विक्रमशिला सेतु पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, सीमांचल और झारखंड की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को हर दिन भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों का माल समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस को भी घंटों जाम में फंसे रहना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।

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प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर काम को समय सीमा के भीतर पूरा करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इंजीनियरों का स्पष्ट मत है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा,

सेंट्रिंग के 28 दिनों के इंतजार और बीम कटिंग की तकनीकी सावधानी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह लाखों यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

इससे साफ है कि सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देते हुए मरम्मत कार्य में और समय लगना तय है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। पुल के पूरी तरह चालू होने में अभी काफी वक्त लगेगा।

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