मुख्य बातें
नीतीश ने कहा, पार्टी विधायकों-सांसदों के कहने पर लिया फैसला
संजय जायसवाल बोले, भाजपा को नीतीश कुमार ने धोखा दिया
बिहार में पांच साल पुराना भाजपा-जदयू गठबंधन मंगलवार को टूट गया। इसी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल फागू चौहान को इस्तीफा सौंप दिया। साथ ही उन्होंने राजद, जदयू, कांग्रेस और वाम दलों के 160 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को देते हुए महागठबंधन की सरकार बनाने का दावा भी पेश किया।
आज पूर्वाह्न 11 बजे जदयू की बैठक में सहमति बनने के बाद सीएम चार बजे से 20 मिनट पहले राजभवन गए और राज्यपाल को त्यागपत्र सौंप दिया। दूसरी ओर राजद विधायक दल की बैठक दिन 11 बजे से शुरू हुई, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों ने तेजस्वी यादव को नेता मानते हुए पूरा समर्थन देने की बात कही।
बिहार के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद जदयू नेता नीतीश कुमार ने कहा कि सभी सांसद और विधायक आम सहमति पर हैं कि हमें एनडीए छोड़ देना चाहिए। इसके तुरंत बाद उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। ये पूछने पर कि भाजपा से क्या परेशानी थी, नीतीश कुमार ने कहा कि इस सवाल का जवाब वे बाद में देंगे। इसके बाद वे सीधे वहां से राबड़ी देवी के आवास के लिए रवाना हो गए। राबड़ी देवी के आवास पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
नयी सरकार में बताया जा रहा है कि कांग्रेस और राजद से दो उप मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, महागठबंधन ने साफ कर दिया कि उन्होंने नीतीश कुमार को ही नेता माना है।
इन सभी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि बिहार की जनता और भाजपा को नीतीश कुमार ने धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि 2017 से और अब क्या अंतर आया, नीतीश कुमार इसका जवाब दें। संजय जायसवाल ने कहा कि 2020 में एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ा। कम सीट जीतने के बाद भी भाजपा ने पीएम मोदी के कहने पर नीतीश कुमार को सीएम बनाया। नीतीश कुमार ने 2017 में गठबंधन तोड़ने का अफसोस भी जताया था।
लोजपा रामविलास पार्टी के अध्यक्ष और जमुई सांसद चिराग पासवान ने कहा कि आज नीतीश कुमार की क्रेडिबिलिटी शून्य है। हम चाहते हैं कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो और राज्य को नए सिरे से जनादेश मिले।नीतीश कुमार की कोई विचारधारा नहीं अगले चुनाव में जदयू को शून्य सीटें मिलेंगी।
लालू की बेटी चंदा ने भाई तेजस्वी यादव की तस्वीर शेयर करते हुए रिएक्ट किया। उन्होंने तस्वीर में लिखा-‘तेजस्वी भवः बिहार’। इसमें जिस तरह से तेजस्वी की तस्वीर लगी हुई है उससे तय है कि लालू के छोटे लाल का रोल नई सरकार में अहम रहने वाला है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता इन्तेखाब आलम ने कहा कि गैर भाजपाई राजनितिक दलों ने जो निर्णय लिया वह स्वागत योग्य है इसे पूरे भारतवर्ष को अपने अपने राज्यों में अनुसरण करना चाहिए।
इन्होंने कहा कि बढ़ती मंहगाई और बेरोज़गारी पर तनिक भी चिंता नहीं दिखानें वाली घमंड में डूबी केन्द्र सरकार के खिलाफ गोलबंद होने का समय आ गया है। इन्होंने कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, बिहार के मकबूल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बामपंथी सहित सभी गैर भाजपाई राजनितिक दल धन्यवाद और बधाई के पात्र हैं जिन्होंने निर्णय लेने में शीघ्रता दिखाई। आलम ने गैर भाजपाई सभी दलों के राष्ट्रीय नेताओं से अनुरोध किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को देश से बाहर का रास्ता दिखाना है तो अभी से एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।
इन्होंने कहा कि आज देश बचाने की लड़ाई है किन्तु परन्तु को छोड़ कर सभी लोगों के मन में केंद्र सरकार की दोगली नीति और डिवाइड एंड रूल के फार्मूले के विरुद्ध जनता एक मत होना चाहती हैं ऐसे मौके को अगर हम खोते हैं तो देश हमें माफ़ नहीं करेगा। इन्होंने कहा कि देश बचेगा तो बहुत राजनीति कर लेंगे। आज हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित देश को हमारी बहुत आवश्यकता है।

















