दरभंगा, देशज टाइम्स। दरभंगा अजमेर एक्सप्रेस को एक माह में चार दिन चलाने के बाद 11 अगस्त को इसे तत्कालिक दो माह का विस्तार दिए जाने पर दरभंगा पर्यटन संस्थान ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णवी को धन्यवाद देते हुए इसे नियमित करने की मांग सहित कुछ सुझाव भी दिया है।
रेल मंत्री को प्रेषित ई मेल में संस्थान के संरक्षक नवीन सिन्हा ने रेल मंत्री को लिखा है कि पहले दिन छोड़ दरभंगा से सभी तीन ट्रिप में यह गाड़ी फूल हुई। काफी यात्री मिले। लेकिन वापसी में यह आधी खाली रही, जिसके कई कारण की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया है।






संस्थान की ओर से रेल मंत्री के संज्ञान में दिया गया है कि यह गाड़ी सिर्फ अजमेर नहीं जाती बल्कि मथुरा जंक्शन भी जाती है। दरभंगा से अजमेर और दरभंगा से मथुरा सहित जयपुर के लिए सीधे खुलने वाली यह पहली ट्रेन है। यह ट्रेन मिथिला के मुस्लिम और हिंदू समुदाय के लिए क्रमशः ख़्वाजा गरीब नवाज, सलवार शरीफ और भगवान कृष्ण से मिलने का एक सुगम माध्यम है। इससे लोग सीधे मथुरा, वृंदावन जा सकेंगे और अजमेर में भी जियारत कर सकेंगे। इस ट्रेन से दोनों समुदायों के लोग एक साथ सफर कर सद्भावना का परिचय देंगे, यह इसका प्रतीक बन सकेगा।
ऐसी परिस्थिति में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यहां के तीर्थयात्री मथुरा, वृंदावन, पुष्कर में दर्शन कर सीधे दरभंगा लौटें और इसी तरह जियारत यात्री भी अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज, सलवार शरीफ में जियारत कर सीधे दरभंगा पहुंचे।
संस्थान ने इस ट्रेन को सप्ताह में दो दिन चलाने की भी मांग की है।
यह भी मांग की गई है कि यह गाड़ी बुधवार को दिन में खुलकर गुरुवार को रात में अजमेर पहुंच रही है, यह ठीक है। लेकिन उसी दिन यह ट्रेन अजमेर से खुलकर दरभंगा के लिए चलेगी। ऐसी परिस्थिति में यहां से लोग सीधे अजमेर, सलवार शरीफ जाएंगे। लेकिन लौटने के लिए उन्हें दूसरी गाड़ी का सहारा लेना पड़ेगा या नहीं तो एक सप्ताह रुकना पड़ेगा। कम से कम 2 से 3 दिन रुक कर अजमेर से लोग दरभंगा सीधे आ सके, इसलिए इसकी वापसी 2 से 3 दिन बाद होना सुनिश्चित करें।
संस्थान का मानना है कि यही कारण है कि दरभंगा से 3 फेरे में यात्रियों से फूल यह गाड़ी वापसी में आधी खाली आ रही है। इसी तरह दरभंगा और आसपास के हिंदू तीर्थयात्री मथुरा, वृंदावन, पुष्कर में जाने के बाद 2 से 3 दिन के बाद इसी गाड़ी से लौटें, इसकी भी व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु इसे 2 या 3 दिन के बाद वहां से खोलने का समय निर्धारित किये जाने की मांग की गई है।
संस्थान ने मुस्लिमों की भावना और संस्कृति की ओर रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए मांग की है अधिकतर मुस्लिम की कोशिश होती है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज अजमेर में अदा करें। ऐसी परिस्थिति में इस गाड़ी के खुलने का दिन बुधवार रखा गया है। बृहस्पतिवार की रात यह गाड़ी पहुंचेगी, यह तो ठीक है। लेकिन इसके दरभंगा प्रस्थान का समय शनिवार की रात या रविवार की रात रखा जाए। जबकि अभी वर्तमान में गुरुवार की रात ही यह गाड़ी दरभंगा के लिए खुल जाएगी। ऐसी परिस्थिति में इस गाड़ी से दरभंगा के जो ज़ियारीन लौटेंगे, उनका शुक्रवार (ज़ूमा का दिन) ट्रेन में ही गुजर जाएगा।
संस्थान के संरक्षक नवीन सिन्हा ने रेल मंत्री से पत्र में प्रेषित इन सब बातों पर ध्यान देते हुए मथुरा, वृंदावन, पुष्कर जाने वाले हिंदू तीर्थयात्री एवं अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज , सलवार शरीफ जाने वाले मुस्लिम जियारत दल के लोगों की भावना को ध्यान में रख इस गाड़ी का नाम दोनों समुदाय के लोगों की एक साथ यात्रा देखते हुए सदभावना एक्सप्रेस या इसी नाम के समकक्ष रखने का भी सुझाव दिया है।
साथ ही संकेत, मांग एवं रेल मंत्री के ध्यान आकृष्ट के लिए दरभंगा पर्यटन संस्थान के दर्जनो सदस्य इस गाड़ी से दिनांक 17 अगस्त, बुधवार को दरभंगा से मथुरा और अजमेर के लिए यात्रा के लिए आरक्षण कराया है और मजबूरीवश दूसरी गाड़ी से वापसी आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, दरभंगा पर्यटन संस्थान के तहत 2014 से अब तक तीन हज़ार से अधिक बुजुर्ग हिंदू, मुस्लिम, दोनों समुदाय के लोगों को अलग अलग तीर्थ यात्रा एवं ज़ियारत पर ले जाया गया है और यह क्रम लगातार जारी है।
संस्थान ने इस दौरान अपने अनुभव के आधार पर रेल मंत्री से यह विभिन्न मांग की है और रेल एवं जनहित में सुझाव भी दिया है।







