
दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। दरभंगा की पुलिसिंग एक अलग पहचान रखती है। कारनामे इतने कि एक-एक कर सामने लाया जाय तो गिनती भी कम पड़ जाएगी। वरीय पुलिस अधिकारियों का तो भय ही खत्म हो गया है। मनमर्जी थानेदार या पुलिसकर्मी करते रहते हैं। पर, इनकी शिकायत कौन करेगा?
अगर इनकी शिकायत होती भी है तो कार्रवाई कौन करेगा। एसएसपी जब जनता दरबार में आते हैं तो पीड़ितों की कतार रहती है। पीड़ितों को एसएसपी से भेंट के बाद एक उम्मीद जागती है कि अब न्याय जरूर मिलेगा। लेकिन, थानेदारों की करतूत से थके हारे पीड़ित कई बार आते हैं और आवेदन देकर पुनः घर चले जाते हैं।
आज एक ऐसा ही मामला एसएसपी के जनता दरबार में आया। लहेरियासराय थानाध्यक्ष के विरुद्ध एक प्रमाणित मामला शाहगंज निवासी मनोज भास्कर ने एसएसपी को दिया। एसएसपी ने लहेरियासराय थाना अध्यक्ष को डांट पिलाई लेकिन उनके विरुद्ध लगे आरोप की जांच करने पुनः उन्हीं को दे दिया।
अब ऐसे में वो अपने विरुद्ध लगे आरोप की जांच क्या करेंगे। एसएसपी अवकाश कुमार ने लहेरियासराय थाना अध्यक्ष को कहा हे कि दस दिनों के भीतर बिंदुबार जांच कर किये गये कारवाई से अधोहस्ताक्षरी को अवगत कराये।
मनोज ने एसएसपी को दिये आवेदन में कहा है कि कमर्शियल चौक स्थित अभिनंदन मार्केट में अंजली इंटरप्राइजेज नाम से उनकी दुकान है। 22 सितंबर 22 को सुबह आठ बजे कुछ बदमाशों ने उनके दुकान का ताला तोड़कर उनका सामान ले गया। इसकी शिकायत जब लहेरियासराय थानाध्यक्ष से करने गये तब उन्होंने यह कहकर भगा दिया कि यह सिविल का मामला है।
मनोज ने कहा कि फिर उसने एसएसपी के यहां गया लेकिन एसएसपी साहब नहीं थे तो वह आवेदन एसडीपीओ अमित कुमार को दिये एवं घटना क्रम बताया। उसने बताया कि एसडीपीओ श्री कुमार ने आदेश देते हुये उक्त आवेदन को थाना भेजा। फिर भी थानाध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज नहीं किया।
मनोज ने कहा कि दुकान में बदमाशों की ओर से ताला तोड़ने से लेकर सामान ले जाने तक बेंक के सीसीटीवी में फुटेज हे यही नहीं हम थाना गये हे वह भी सीसीटीवी फुटेज हे। कारवाई करने के एवज में थानाध्यक्ष ने जांच में पुलिस अधिकारी मुकेश मंडल को भेजा। मनोज ने कहा कि जांच अधिकारी के साथ दो सुपर थानाध्यक्ष (थाने का dalaal)भी पहुंचे। उसने समझौता करने का दबाव बनाया। इधर मकान मालिक मुझे इसी बहाने दुकान खाली करने का दबाव बनाया। मनोज ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि मेरे दुकान का ताला तोड़कर चोरी किया है।
मनोज का कहना हे कि थाने में दलाल के दबाव के कारण थानाध्यक्ष ने अभियुक्तों का आवेदन लेकर पहले उसका कांड (487/22)दर्ज किया फिर मेरा (488/22)कांड दर्ज किया। मनोज ने आवेदन में कहा हे कि पुलिस ने इस मामले में अभियुक्तों से मोटी रकम लेकर उसे जबरन उठाकर थाना लाया और पूरा दिन थाना पर रखा यही नहीं काफी दबाव बनाया फिर देर शाम उसे जमानत पर छोड़ा। दरभंगा पुलिस के ऐसी पुलिसिंग पर शहरवासी ह्तप्रब्ध है।
हालांकि एसएसपी के संज्ञान में मामला आते ही दस दिनों के भीतर बिंदु बार जांच कर प्रतिवेदन मांगा है। थाना अध्यक्ष ने इस मामले में अब चुप्पी साध ली है। लेकिन सवाल तो उठता हे कि थाने को आखिर कौन चला रहा हे थानाध्यक्ष या सुपर थानाध्यक्ष (दलाल)। अगर ऐसी ही हरकत थानाध्यक्ष करते हैं तो आम लोंगों का गुस्सा फूटना लाजमी हैं।


