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सत्ताधारी दल के विधायक सुदर्शन कुमार पर धांधली कर बालू ठेका लेने का आरोप लग रहा है. आरोप है कि बरबीघा से जेडीयू विधायक सुदर्शन कुमार ने लोक प्रतिनिधित्व कानून के खिलाफ अपने फर्म को ठेका दिलाया है.

Image Credit source: File photo
बिहार के एक और MLA की सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है. यहां सत्ताधारी दल के विधायक सुदर्शन कुमार के फर्म को करोड़ों का बालू का ठेका दिया गया है. विधायक को मिले बालू के ठेके पर आरोप लग रहा है कि उनकी फर्म को ठेका देने के लिए जमकर धांधली की. इसके साथ ही बालू के इस ठेके को जन प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन भी बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि अगर आरोप साबित होते हैं तो विधायक की विधानसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है.
विधायक का नाम सुदर्शन कुमार है. वह बरबीघा से जेडीयू की टिकट पर विधानसभा पहुंचे हैं. विधायक सुदर्शन कुमार की फर्म सुनीला एंड संस फीलिंग स्टेशन को लखीसराय जिले में 19 करोड़ से ज्यादा का बालू ठेका दिया गया है.
ठेका देने में धांधली का आरोप
सरकारी कागजातों में दर्ज है कि सुनीला एंड संस फीलिंग स्टेशन के मालिक सुदर्शन कुमार हैं. सुदर्शन कुमार ने 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने शपथ पत्र में भी इसके बारे में जानकारी दी है. विधायक को बालू का ठेका देने जमकर धांधली किए जाने का भी आरोप है.बालू खनन के जिस ठेके को सुदर्शन कुमार को दिया गया है उसमें बोली लगाने वाले गोपाल कुमार सिंह ने यह आरोप लगाया है और बिहार सरकार के आला अधिकारियों को पत्र भी लिखा है.
क्या कहता है लोक प्रतिनिधित्व कानून
अगर इस मामले में आरोप साबित होते हैं तो विधायक सुदर्शन की विधानसभा सदस्यता जा सकती है. उनपर लोक प्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन आरोप लग रहा है. लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 के अनुसार कोई विधायक किसी तरह का कोई सरकारी ठेका नहीं ले सकता है. विधायक का किसी कंपनी में 25 प्रतिशत से ज्यादा शेयर है तो उस कंपनी या प्रतिष्ठान के नाम पर सरकारी ठेका नहीं लिया जा सकता है. सुदर्शन कुमार तो सुनीला एंड संस फीलिंग स्टेशन के मालिक हैं.
‘किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया’
मामले में जेडीयू विधायक कुमार ने कहा-यह कंपनी उनके मां के नाम पर है. उनके निधन के बाद वह इसके प्रोपराइटर बने हैं. उन्होंने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है.सुदर्शन ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया. उन्होंने कहा कि विधायक होने के बावजूद अगर सरकार के पास तय राशि जमा कर वह कॉन्ट्रैक्ट ले रहे हैं तो इसमें क्या गलत है?
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