
बेनीपुर। वृद्ध, विधवा, दिव्यांग की समुचित देखरख के लिए करोड़ों रुपए की लागत से प्रखंड मुख्यालय में निर्मित बुनियाद केंद्र अपने उद्घाटन के 2 वर्षो के अंदर ही दम तोड़ने लगी है।
10 स्वीकृत पदों के विरुद्ध मात्र दो कार्यालय कर्मी के बदौलत उक्त केंद्र संचालित हो रही है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्ध विधवा एवं दिव्यांग की समुचित देखरेख के लिए उक्त केंद्र की स्थापना की गई थी।
इसके भवन निर्माण पर ही लगभग ₹5करोड़ रुपए व्यय की गई थी। साथ ही वृद्ध विधवा एवं दिव्यांगों के उपकरणों के लिए एवं उनके समुचित देखरेख के लिए करोड़ों रुपए का उपकरण के साथ अन्य व्यवस्था की गई थी।
इसमें फिजियोथेरेपी से लेकर आंख नाक कान, हाथ,पांव तक के कृत्रिम उपकरण तक मुहैया कराने की व्यवस्था की गई थी । जिसके लिए 10 पदों के सृजन के साथ-साथ 5 पद आउटसोर्सिंग से रखने का प्रावधान किया गया था। इसमें प्रबंधक एक, लेखापाल एक, केस प्रबंधक एक, फिजियोथैरेपिस्ट दो, मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर एक, स्पीच थैरेपिस्ट एक, साइकोलॉजिस्ट एक के साथ-साथ केयर गण एक एवं सफाई कर्मी 2 के साथ साथ सुरक्षा गार्ड 3 आउटसोर्सिंग से रखने का प्रावधान किया गया था।
इसे वर्ष 2020 में सभी उपकरणों से नवनिर्मित भवन में सुसज्जित करते हुए सभी पदों पर सरकार की ओर से नियुक्त करते हुए तामझाम से शुभारंभ किया गया। लेकिन 2 वर्ष बीतते-बीतते लेखापाल, कैश मैनेजर एवं स्पीच थैरेपिस्ट को छोड़कर सभी कर्मी यहां से स्थानांतरित होकर अन्य जगह चले गए।
यहां तक की प्रबंधक का पद भी महीनों से रिक्त पड़ा हुआ है। और सभी विभागों में फिजियो थेरेपी से लेकर आंख कान नाक गला विभाग तक में ताला झूल रहा है।
इस संबंध में पूछने पर लेखापाल सह प्रभारी प्रबंधक अनुज कुमार बताते हैं कि साधन एवं संसाधन उपलब्ध रहने के बावजूद विशेषज्ञ कर्मियों के अभाव में यहां समुचित देखरेख आने वाले मरीजों को नहीं हो पाती है। फलत: 20 से 25 मरीजों के बजाय 2 से 3 मरीज पहुंच रहे हैं, उसका भी समुचित देखरेख संभव नहीं हो पा रही है। इसके लिए विभाग को कई बार लिखा गया है कर्मियों के पदस्थापना की प्रतीक्षा की जा रही है।






