
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जीरो टॉलरेंस वाले इस राज्य में भ्रष्टाचारियों की कमी नहीं हैं। जड़ें इतनी मजबूत कि आप उखाड़ नहीं सकते। अगर आप उखाड़ने की कोशिश करेंगे तो आप खुद शून्य हो जाएंगे।
आप किसे ईमानदार और किसे बेईमान कहेंगे? इनकी परत इतनी मजबूत हैं कि खुद से लेन-देन नहीं करते और कहने में हिचकते नहीं कि मैं ईमानदार हूं। लेकिन, इनकी कार्यशैली से पता चल जाता है कि कौन कितना ईमानदार हैं और कौन कितना भ्रष्ट?
आखिर क्या कारण है कि सरकार की ओर से स्थापित कानून को ये पदाधिकारी कैसे धज्जियां उड़ाते हैं। इनके साहसिक कदम का कोई जोड़ नहीं बेजोड़ हैं। पढ़िए देशज टाइम्स के अपराध ब्यूरो प्रमुख Sanjay Kumar Roy (सर्वश्रेष्ठ से जुड़ें 9835241923) की EXCLUSIVE REPORT की अगली कड़ी
डीजीपी आरएस भट्टी के योगदान के बाद पुलिसिया व्यवस्था में सुधार की बात सामने आ रही थी। लेकिन, पुलिस के आला पदाधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है? ऐसे में कोई भी बात करना बेईमानी है।
वर्षों से जमे एवं जिला अवधि-क्षेत्रावधि पूर्ण कर चुके पुलिस पदाधिकारी-कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सभी डीआईजी-आईजी-एसपी और एसएसपी को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि इनका स्थानांतरण आवश्यक हैं। सूची भी बनी। स्थानांतरण भी हुआ लेकिन विरमित जिला में स्थानांतरित हुए पुलिसकर्मियों ने योगदान नहीं दिया। आईजी के पत्र से पता चलता है कि स्थानांतरित किये गये पुलिसकर्मियों की विरमित की तिथि से मधुबनी के एसपी की ओर से समायोजन कर दिया गया हैं।
अब सवाल यही हैं कि अगर आईजी के निर्देश का कोई एसपी अवहेलना कर रहा है तो उस एसपी के विरुद्ध कार्रवाई करना या पत्र के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को अवगत कराना आईजी का दायित्व है। अगर एसपी के विरुद्ध आईजी सख्त कदम नहीं उठा रहें हैं तो इसका क्या मतलब हैं? और, ऐसे में पुलिस की अनुशासनिक व्यवस्था कैसे बचेगी, जो पुलिस का मूलभूत ढांचा है।
दरभंगा के एसएसपी एवं समस्तीपुर के एसपी भी आईजी को बार-बार पत्र लिखकर आग्रह कर रहे हैं कि उनके जिला में अबतक किसी पुलिसकर्मियों-पदाधिकारियों का योगदान नहीं हुआ है। वहीं, यहां से स्थानांतरित हुए पुलिसकर्मी विरमित हो चुके हैं। इसकी सूचना दोनों जिले के एसपी ने मधुबनी एसपी को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया हैं।
दरभंगा एसएसपी मधुबनी के एसपी से सीनियर हैं। इस नाते भी उनके अनुरोध पर मधुबनी एसपी को संज्ञान लेना चाहिए। आईजी के आदेश-निर्देश को मधुबनी के एसपी ने रद्दी की टोकरी में डालकर उन्हें धत्ता बता दिया हैं। ऐसे में, मुख्यालय के आदेश की भी अवहेलना उनकी ओर से की गई है। ऐसे में सवाल फिर वही है कि सरकार के आदेशों की अवहेलना बार-बार हो रही है। ऐसे में कार्रवाई करेगा कौन?







