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फ़रवरी, 24, 2026
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Darbhanga के बिरौल थाने को दलालों के चंगुल से आजादी…बस इसी लड़ाई की है तैयारी

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दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। दरभंगा जिले का बिरौल थाना को दलालों के चुंगल से आजादी मिलने वाली है। इसकी तैयार शुरू हो गई है। कई दशक से यह थाना दलालों के इशारे पर काम कर रहा था।

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इस थाना की दलाली करने वाले कुछ लोग इतने चर्चित हुये कि तीन दशक पहले माननीय हो गये। माननीय होने के बाद इनके गुर्गे वहां के बॉस हो गये। ऐसे में थानेदारी करना नये थानाध्यक्षों को एक चुनौती भरा कार्य हैं।

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नये थानाध्यक्ष के रूप में पुनि सत्य प्रकाश झा वहां योगदान दे रहें हैं। ऐसे में, उनके साथ एक बड़ी समस्या यह है कि इस थाना को कैसे दलालों से मुक्त करेंगे! अगर दलालों को वहां से हटाने का प्रयास करेंगे तो उन्हें एक लड़ाई लड़नी पड़ेगी?

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फिलहाल, यह लड़ाई वहां तैनात एसडीपीओ मनीष कुमार लड़ रहें हैं। एसडीपीओ मनीष कुमार की छवि एक ईमानदार पुलिस पदाधिकारी की है। और, बेहतर पुलिसिंग देने के लिये वे कोई कसर नहीं छोड़ रहें हैं। गरीब और लाचार की बात सुनना और उसे न्याय देना उनके कार्यशैली की प्राथमिकता हैं।

ऐसे में, उनकी कार्यशैली ऐसी हैं कि दलालों को फटकने तक नहीं देते। सभी दलाल चिन्हित हैं और ऐसे दलाल को अपने गेट के भीतर आने देना भी मुनासिब नहीं समझते। इसका नतीजा यह हैं कि उनके विरुद्ध कई दलाल उत्तेजित हो गये हैं और उनके विरोध में स्थानीय लोंगों को भड़का रहें हैं। लेकिन इन बातों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

तात्कालीन थानाध्यक्ष की कार्यशैली मधुबनी जिला से ही संदिग्ध रही। बताया जा रहा कि एक बड़े मामले में इनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल हैं। ऐसे परिस्थिति में इन्हें कैसे थानेदार बनाया गया ये बड़ा प्रश्न है? लेकिन, इनकी कई गलतियों का खामियाजा वहां के एसडीपीओ मनीष कुमार चौधरी को भुगतना पड़ा हैं।

कहा जाता हैं कि तात्कालीन थानाध्यक्ष कई ऐसे मुद्दों को कुछ पैसों के खातिर थानेदारी कम दलालों के फेर में ज्यादा चलते रहें। नतीजा हुआ कि बिरौल थाना दलालों का अड्डा बन गया था। आम आदमी को न्याय देना दूर फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते थे, ऐसे में एसडीपीओ मनीष कुमार की भूमिका अहम हो जाती थी, और सारे विवादों को शांत करना उनके लिये मुश्किल भरा काम हो गया था।

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लेकिन, एसएसपी दरभंगा ने बिरौल थाना में नये थानाध्यक्ष के रूप में श्री झा की पोस्टिंग कर सूझ बूझ का परिचय दिया हैं। लेकिन नये थानाध्यक्ष को थाने को पटरी पर लाने के लिये काफी मशक्कत करनी होगी। ऐसे में उन्हें एसडीपीओ समेत जिला के तमाम पदाधिकारीयों को उनके साथ कदम में कदम मिलाकर खड़ा होना पड़ेगा।

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