
बिहार के सिपाही अब भरोसेमंद बनेंगे। सरकार इन्हें बड़ी और महथी जवाबदेही देने जा रही है। अब इनके जिम्मे अनुसंधान का भी कार्य शामिल होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसको लेकर फैसला सुना दिया (PTC pass ‘soldiers’ will also investigate cases) है।
दरअसल, आज नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार दोपहर मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार पुलिस के पीटीसी प्रशिक्षण करने वाले सिपाही रैंक के पुलिस अधिकारियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसंधान की शक्ति दी गई है।
नीतीश सरकार ने आज बड़ा फैसला लेते हुए पीटीसी प्रशिक्षित सिपाहियों को भी केस के अनुसंधान का जिम्मा दिया है। कैबिनेट से यह प्रस्ताव पास हो गया है।
बिहार राज्य प्रोटोकॉल संवर्ग के विभिन्न कोटि के 15 पदों के सृजन एवं बिहार प्रोटोकॉल संवर्ग नियमावली 2023 की स्वीकृति दी गई है। भामाशाह की जयंती हर साल 29 अप्रैल को पटना के पुनाइचाक पार्क में राजकीय समारोह के रूप में मनाए जाने की भी स्वीकृति दी गई है।
बिहार पुलिस के पीटीसी प्रशिक्षण उतीर्ण सिपाही रैंक के पुलिस अधिकारियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसंधान की शक्ति दी गई है। इसके लिए बिहार पुलिस हस्तक 1978 में संशोधन किए गए हैं।
गृह विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी। कैबिनेट मीटिंग के बाद अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बताया कि रिजर्वेशन में आरक्षण का मामला कोर्ट में लंबित है।
इस वजह से प्रमोशन की कार्यवाही बाधित है। प्रमोशन रूके होने की वजह से जांच अधिकारी की कमी है। ऐसे में सरकार ने निर्णय लिया है कि जो सिपाही प्रमोशन के कगार पर हैं, पीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण हैं, उन्हें केस के अनुसंधान का जिम्मा दिया जाए। अन्य राज्यों में भी यही व्यवस्था लागू है।
बिहार मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण नियमावली 2023 की स्वीकृति दी गई है। इस नियमावली के बाद जिलों में वाहन दुर्घटना केस के निष्पादन के लिए दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण का गठन किया जाएगा।
जिलों में दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के गठन के बाद वाहन दुर्घटना पीड़ितों की ओर से दायर केस का तेज गति से निष्पादन हो सकेगा।