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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

जाम से हम उसी तरह डरते हैं जैसे शोले में गांव वाले गब्बर सिंह से डरते थे…हे सरकार

समय के साथ तमाम परिभाषाएं बदल जाती हैं। पहले दूरी का मात्रक मील व किलोमीटर हुआ करता था। फ़िर घंटे व दिन हुआ। इधर...

न किसी के दांत तोड़ें, न अपने तुड़वाएं, कृपया गाड़ी धीरे-धीरे चलाएं

इन दिनों नगर में यातायात व्यवस्था नाममात्र की रह गई है। ट्रैक्टर, ऑटो, छोटे वाहन यहां तक कि रिक्शा व बाइक चालक अपने मन के...

लेकर सब्जी इंजेक्शन से ताजी-ताजी कर लो, आया है सब्जी वाला!

रसीले और खट्टे-मीठे फलों का महत्व बढ़ गया है। इसके कारण फलों व हरी सब्जियों की कीमतों में वृद्धि भी हो जाती है। महंगाई...

होठों पर मुस्कान लिए घर से निकली थी कि पड़ी नजर शैतानों की और डूब गई नाव इंसानियत की

शहर का माहौल बेहद अफसोसजनक है। कहीं भी किसी भी सरकारी या निजी स्कूलों के बाहर बेटियां आज सुरक्षित नहीं हैं। सुरक्षा के कोई...
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फिर वो तो सारी उम्र अनुदान की रोटी ही चाहेगा, हर दिन नेताओं की झोली ही उठाएगा

स्कूलों में मिड डे मिल के नाम पर लूट मची है। स्कूल के प्रिसिंपल मालामाल हो रहे। उनके कर्ता-धर्ता नेहाल हो रहे। मगर स्कूल...

ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं, मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बेख़बर नहीं

सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट में अधिकारी जुटे हैं। मगर जानते नहीं, हिंदुस्तान की संपत्ति सरकार की संपत्ति है, इसे जो खाएगा ज्यादा जिंदा रहेगा...

मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूं पर कहता नहीं  बोलना भी है मना, सच बोलना तो दरकिनार

ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के सारे प्रयास नाकाम हैं। मिनी बसें, लंबी दूरी की बसें, बाइक, रिक्शा यहां तक कि साइकिल सभी  सवारी ओवरलोड...

गौर फरमाइएगा साहेब, आप उसे मार नहीं पाए क्योंकि उसकी रगों में आप ही का खून है

शहर में मच्छर बेहिसाब हैं। पहले गर्मी में दिखती थी अब ताक सर्दी की धूप में, रजाई की छांव में, शहर की भीड़ में,...
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देखने सूरत गया था आइने के सामने आईना रोने लगा हालत हमारी देखकर

शहर में यातायात सुधार की बात कई बार हुई। हर बार विफल रही। कोई सुधरने को तैयार नहीं कोई कुछ मानने को कतई तैयार...

गरीब की दुनिया उजड़ जाती है जब अमीर भर देता है झोली जज के घर जाकर

मैंने तो जिंदगी बिता डाली, इंसाफ के लिए तेरी आंखों से सच्चाई का पर्दा न उतरा पुलिसवालों के लिए वसूली अब वैध की श्रेणी...

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