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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

जिधर भी देखें डेंगू-डेंगू,इक नन्हासा संक्रमित मच्छर, खून चूस कर दम लेते हैं,डेंगू-फीवर कर देते हैं

जिसमें नींद चैन की आती। वो मच्छर-दानी कहलाती।मगर हमारे शहर में पिस्तौल से चलाया जा रहा है काम कारण, लाल-गुलाबी और हैं धानी, नीली-पीली...

तुम भी इस शहर में बन जाओगे पत्थर जैसे, हंसने वाला यहां कोई है न रोने वाला

हर खास और आम को सूचित किया जाता है कि इन दिनों शहर में अतिक्रमण की छूट है। जिस किसी को भी कहीं खाली...

कौन करे रखवाली,बेसुध खेवनहार है,घिरी निराशा,नाव फंसी मझधार है,निजी शिक्षा में बस हाहाकार है

भारत के संविधान में नीति निर्देशक तत्वों में सरकार को यह निर्देश दिया गया था कि वह 14 वर्ष तक के सारे बच्चों के...

मकड़ी में भागे जाला,कीचड़ में बहता नाला, कुछ भी न समझ में आए यह कैसा है घोटाला

यह कैसा है घोटाला, कि चाबी मे है ताला,कमरे के अंदर घर है और गाय में है गोशाला। दातों के अंदर मुंह है, और...
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देश, राज्य बेहाल है, हल्ला भ्रष्टाचार का, करते हैं सब कोय, जो बदलें निज आचरण, हल्ला काहे होय

मानवता हो पंगु जब, करे कौन आचार। नैतिकता हो सुप्त जब, जागे भ्रष्टाचार। प्रथा कमीशन घूस है, छूट करे सरकार। नैतिकता के पाठ का,...

जुर्म, बेइमानी, ठगी, घूसखोरी का यह जमाना जाएगा, स्वतंत्र भारत का सपना गांधी का फिर से आएगा

क्यूं तुम हमें , हर रोज़ ही , कहते हो खबरदार ,जब तुम ही , करते हो यहां, लाशों का व्यापार। हक़ छीने ,...

घर के बाहर जब घर का अकेला कमाऊ मुखिया बीमार पड़ता है वक़्त ठहर जाता है

बीमारी के कष्टदायक दिनों में, मन्थर हुआ समय,एक बार पुनः अपनी पूरी रफ़्तार से उड़न-छू होने लगता है, मन-बावरा ठगा‌ ठिठका, उसे चुपचाप देखता,चला जाता...

नकली दुराचारी शासक चुप बैठे हैं गद्दी पर, असली सिपाही सीमा पर काबिज, फक्र है ऐसी वर्दी पर

देश से लेकर हर शहर तक कराहते स्वर हमें व्यथित कर रहे। सीमा पर जवान मर रहे। आतंकी हमले में बेवजह हमारे सपूत मारे...
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ये कलियुग है ठगी की इन्तेहां होती नहीं कोई, सुना है हर दिन यहां दिल्ली का क़ुतुबमीनार बिकता है

तेरे आदर्श तेरे मूल्य सारे बिक गए बापू, तेरा लोटा तेरा चश्मा तेरा घर-बार बिकता है। बड़े अफसर का सौदा हाँ भले लाखों में...

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है, कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है

प्रेम की अभिव्यक्ति श्रेष्ठ है और किस विधा में वह की गई है इससे प्रेम के एहसास कभी कम नहीं होते। मगर, आधुनिकता की होड़...

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