दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। संस्कृत विश्वविद्यालय के साहित्य विभाग की ओर से मुख्यालय के बहुउद्देशीय भवन में मंगलवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि प्रोवीसी प्रो. चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि ऐसा कार्यक्रम बराबर होना चाहिए। इससे विचारों में नवीनता आती है और विषय मंथन का मौका भी मिलता है।
कार्यशाला के प्रतिभागी बेहतरी के लिए अपने आप को अपडेट करते हैं जो शास्त्र के साथ साथ स्वयं के लिए भी उपयोगी होता है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में यह जानकर बेहद खुशी हुई कि साहित्य के व्यंजना के निहितार्थ इतने गहरे हैं।
जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने देशज टाइम्स को बताया कि कुलपति प्रो. सर्व नारायण झा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि थे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित व अनेक पुस्तकों के रचयिता डॉ. किशोरनाथ झा और मंच संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे थे डॉ विश्राम तिवारी। डॉ. नंदकिशोर चौधरी के संयोजकत्व में साहित्य के व्यंजना विषय पर आयोजित कार्यशाला में तकरीबन 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। मौके पर डॉ. मीना कुमारी, डॉ रेणुका सिंहा, अतिथि शिक्षक डॉ. संतोष कुमार पासवान समेत अन्य लोग उपस्थित थे।







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