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पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह नीतीश सरकार के खिलाफ लाएंगे बिल

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कृषि मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आरजेडी विधायक सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया है। सुधाकर सिंह जब मंत्री थे तो नीतीश कुमार से कृषि कानून में बदलाव की थी। जब उनकी नहीं सुनी गयी तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। वहीं अब सुधाकर सिंह सरकार के खिलाफ सदन में कृषि के लिए प्राइवेट बिल लाने की तैयारी में है। दरअसल 44 साल बाद एक बार फिर कृषि व्यवस्था में बदलाव को लेकर प्राइवेट बिल लाने की तैयारी की जा रही है।

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किसानों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरने लेने वाले सुधाकर सिंह विधानसभा में प्राइवेट विधेयक लाने की तैयारी में आज प्रेस कांफ्रेस करते बताया कि बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में वो एक प्राइवेट विधेयक पेश करेंगे। जिसका नाम कृषि उपज और पशुधन विपणन एवं मंडी स्थापना विधेयक होगा।

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उन्होंने इस विधेयक को बिहार के किसानों के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि इस बिल के पास होने से बिहार के किसानों की बदहाली दूर होगी। सुधाकर सिंह ने इस विधेयक के उद्देश्यों को भी समझाया।

 

सुधाकर सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार में कृषि मंत्री का पदभार सँभालने के बाद बिहार में कृषि उत्पादन के आंकड़ों और बिहार के कृषि व्यवस्था के अवलोकन करने का मौका मिला। विभागीय अवलोकन करने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि 2006 में निरस्त किये गए बिहार कृषि उपज बाजार अधिनियम के बदले में बिहार में नई कृषि मार्केटिंग या मंडी कानून के नहीं होने से बिहार की कृषि व्यवस्था चरमरा गई है और इसका भयानक प्रतिकूल असर बिहार की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।

 

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बिहार की राजनीति में यह पहली बार देखने को मिलेगा जब कोई पूर्व कृषि मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ प्राइवेट प्राइवेट बिल सदन में लाने की तैयारी कर रहे है। पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार के गलतियों की वजह से आज बिहार के किसान का हाल बेहाल है, जहां बिहार में चावल 2200 सौ किलो प्रति हेक्टेयर का उपज है। तो पंजाब में 4800 किलो प्रति हेक्टेयर है. अगर हम पंजाब के मुकाबले बिहार के किसानों को आय की बात करें तो 20000 करोड़ का सालाना कम आय हो रहा है जो एक स्टेट के बजट के बराबर है।

उन्होंने कहा कि 2006 में बिहार में कृषि उपज बाजार समिति (APMC) अधिनियम खत्म करके इसे एक बड़ा सुधारवादी कदम बिहार सरकार के द्वारा बताया गया था। उस समय नीतीश कुमार को सत्ता संभाले केवल एक साल ही हुआ था। आज लगभग 16 साल बीत चुके हैं।

इतने साल बाद भी किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए अनुकूल बाजार नहीं मिल पाया है और किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। इसलिए “कृषि उपज और पशुधन विपणन एवं मंडी स्थापना विधेयक” बहुत जरुरी है।

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वहीं सुधाकर सिंह ने कहा है कि NCAER 2019 के अनुसार “2006 में कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम को समाप्त करने के बावजूद नए बाजारों के निर्माण और मौजूदा बाजार में सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में निजी निवेश बिहार में नहीं हुआ, जिसकी अपेक्षा कानून समाप्त करने के समय किया गया था जिससे बाजार घनत्व कम हो गया

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