वायुसेना को आज लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस का पहला ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान मिल गया। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने बुधवार को बेंगलुरु में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी को सौंपा।
तेजस ट्विन सीटर ट्रेनर विमान एक हल्का विमान है। इसकी एक बड़ी खासियत यह भी है कि यह विमान किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को कुल 18 ट्विन सीटर विमान का ऑर्डर दिया गया था।
भारतीय वायु सेना द्वारा दिए गए इस आर्डर में से 8 विमान अगले साल तक दे दिए जाने हैं। शेष 10 विमानों को 2026-27 तक इंडियन एयर फोर्स के सुपुर्द किया जाएगा।
भारतीय सेना के पास एलसीए तेजस का एडवांस्ड वर्जन मार्क-1 ए विमान पहले से ही है। एयर फोर्स के पास उपलब्ध यह विमान एक फाइटर जेट है जो 2205 किमी प्रति घंटे की स्पीड से हवा में उड़ता है। यही नहीं एयर फोर्स का यह फाइटर जेट 6 तरह की मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम है।
भारतीय वायुसेना ने 123 तेजस फाइटर जेट मांगे थे, जिसमें से 31 मिल चुके हैं। ये सभी तेजस मार्क -1 हैं। जबकि बुधवार को एयरफोर्स को सौंपा गया, तेजस टू-सीटर ट्रेनिंग विमान है। हालांकि ट्रेनिंग विमान होने के बावजूद आपातकालीन स्थिति में इसे बतौर फाइटर जेट भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे पहले मंगलवार को एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बताया कि वायुसेना 97 हल्के लड़ाकू विमान तेजस मार्क 1ए खरीदने की अपनी योजना पर आगे बढ़ रही है।
इसके अलावा एयर चीफ मार्शल चौधरी ने यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की तीन यूनिट मिलीं। वायुसेना को अगले साल तक मिसाइल सिस्टम की शेष दो और यूनिट मिलने की उम्मीद है।
एचएएल के अध्यक्ष सीबी अनंतकृष्णन ने एक औपचारिक समारोह में रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट की उपस्थिति में एलसीए तेजस का पहला ट्रेनर संस्करण सीएएस एयर चीफ मार्शल चौधरी को सौंपा। एचएएल और भारतीय वायु सेना के बीच अनुबंध के हिस्से के रूप में कुल 10 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान की आपूर्ति की जानी है, जिसमें से यह पहला है।
इस कार्यक्रम में वायु सेना के उप प्रमुख, भारतीय वायुसेना के दक्षिणी वायु कमान के अधिकारी और परियोजना से जुड़े कई अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। एचएएल ने पहला तेजस ट्रेनर बना लिया है, जो अंतिम विकासात्मक परीक्षण उड़ानों से गुजर चुका है।
तेजस डिवीजन के दौरे पर एयर मार्शल दीक्षित को एचएएल टीम ने ट्रेनर एयरक्राफ्ट के उत्पादन की स्थिति और एलसीए मार्क-1ए की डिलीवरी की योजना के बारे में जानकारी दी थी।
बेंगलुरु में एयरो इंडिया के दौरान 03 फरवरी 2021 को रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ स्वदेशी सैन्य उड्डयन सेवा में अब तक का सबसे बड़ा सौदा करके 83 तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट की डील फाइनल की थी।
वायु सेना को फरवरी 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से पहला लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस मार्क-1ए मिलेगा।
श्रीनगर स्थित स्वॉर्ड आर्म्स स्क्वाड्रन तेजस एमके-1ए प्राप्त करने वाली पहली स्क्वाड्रन होगी। अभी तक यह स्क्वाड्रन मिग विमानों का ठिकाना है, जिन्हें तेजस की आपूर्ति शुरू होने के बाद सेवा से विदाई दी जानी है।
एचएएल के मुताबिक तेजस एमके-1ए में डिजिटल रडार चेतावनी रिसीवर, एक बाहरी ईसीएम पॉड, एक आत्मसुरक्षा जैमर, एईएसए रडार, रखरखाव में आसानी और एवियोनिक्स, वायुगतिकी, रडार में सुधार किया गया है। इसमें उन्नत शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (एएसआरएएएम) और एस्ट्रा एमके-1 एयर टू एयर मिसाइल लगाईं जाएंगी।
तेजस एमके-1ए के 20 विमान प्रति वर्ष वायु सेना को मिलेंगे। तेजस एमके-1ए की आपूर्ति 2024 से शुरू होगी और 2027 तक पूरे 83 विमान वायुसेना को मिल जाएंगे। इनमें 73 लड़ाकू विमान और 10 ट्रेनर विमान होंगे। एलसीए तेजस एमके-1ए संस्करण में फिलहाल स्वदेशी सामग्री 50% है जिसे 60% तक बढ़ाया जाएगा।







