
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि दूसरे राज्यों में ज्यादा मौतें होती है, वहां एनएचआरसी (NHRC) की टीम क्यों नहीं जाती है। इधर बीजेपी ने कहा-यदि बिहार सरकार कुछ छिपाना नहीं चाहती, तो आयोग की टीम के दौरे का राजनीतिक विरोध क्यों किया जा रहा है? वहीं, नीतीश के सारथी और जदयू के कद्दावर नेता पार्टी के एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। कहा, सरकार शराबबंदी खत्म करने को हम तैयार हैं बस इतना करवा दीजिए…पढ़िए पूरी खबर
जहरीली शराब से मौत को लेकर बीजेपी पूरे प्रदेश में हल्ला बोल कर रही है। बीजेपी नीतीश सरकार पर हमलावर है और इसके लिए सीएम नीतीश को जिम्मेदार ठहरा रही है। इसे नरसंहार बता रही है। इसको लेकर बिहार की राजनीति में इन दिनों जहरीली शराब का मामला सबसे अधिक सुर्ख़ियों में बना हुआ है। विपक्षी दल इस मामले को हर तरफ से सरकार को कुसुरवार ठहरा रही है। वहीं, सरकार इस मामले में शराब का सेवन करने को गलत बता रही है।
बीजेपी जहरीली शराब पीकर मरने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रही है। इधर नीतीश कुमार ने साफ कह दिया है कि जो पिएगा वह मरेगा। मुआवजा किस बात का दें। वहीं, जहरीली शराब से मौत के मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम मंगलवार को बिहार पहुंची है। एनएचआरसी (NHRC) की टीम के बिहार आने के बाद जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया।
‘दूसरे राज्यों में क्यों नहीं जाती NHRC : नीतीश कुमार’
बुधवार को सीएम नीतीश कुमार ने भी एनएचआरसी (NHRC) की टीम के बिहार आने पर प्रतिक्रिया देते कहा कि यदि जांच की टीम यहां आयी है तो उसको दूसरे राज्यों में भी जानी चाहिए। उनको यह देखंना चाहिए कि दूसरे राज्यों की तुलना में यहां सबसे कम मौत हुई है। हमलोग तो खुद इस घटना की जांच कर रहे हैं।
इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार ने बीजेपी का बिना नाम लिए कहा-उनको जरा संविधान को जानने की जरूरत है। हर चीज़ को अच्छे से समझने की जरूरत है। उनको यह समझना चाहिए कि यह जो शराबबंदी कानून लागु है वो किसका अधिकार है। इसको लेकर संविधान में सबकुछ साफ़ है।
वहीं,जदयू के कद्दावर नेता पार्टी के एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि, आज विपक्ष शराब को लेकर हंगामा कर रही है। इसमें कई ऐसे लोग है जो शराबबंदी का समर्थन करते हुए शपथ लिए थे और आज इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि, शराबबंदी पर आपकी समझ क्या है।
भाजपा इसपर परस्पर विरोधी बयान दे रही है, केंद्रीय मंत्री कह रहे हैं कि इसपर फिर से विचार कीजिए। उनके पार्टी के नेता बोलते हैं हम शराबबंदी के पक्ष में है तो कुछ लोग बोलते हैं इस कानून को वापस लो। इसलिए सबसे पहले तो उनको खुद में एकजुटता लानी चाहिए।
वहीं, बीते कल चिराग पासवान द्वारा लोकसभा में बिहार के छपरा कांड को लेकर उठाए गए सवालों के बारे में अपनी बात रखते हुए नीरज कुमार ने कहा कि, चिराग पासवान राजनीति में नए भक्ति रस में डूबे हुए हैं, अब उनको उम्मीद जगा है की कहीं मुझे भी केंद्रीय मंत्री का कोई पद मिल जाए। वो तो अब अकेले हैं, उनके दल के सांसद ही उनसे अलग हो गए। चिराग पासवान का जुबान भाजपा के खिलाफ नहीं खुलता है।
इसके आलावा उन्होंने कहा कि, जो भी लोग इस कानून के बारे में समीक्षा या पुर्नविचार करने की मांग कर रहे हैं, वो लोग अपने घर की महिला और बच्चों से एफिडेविट करवा कर दें कि शराबबंदी खत्म होना चाहिए या नहीं। वहीं, मानवाधिकार टीम की ओर से जांच करने के विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विरोध की बात नहीं है , बस हमलोगों का कहना है कि यह जांच सिर्फ एक राज्य में क्यों हो रहा है।






