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SSB Raising Day: शौर्य की गाथा, सेवा का संकल्प और ग्रामीण युवाओं की जोश भरी दौड़

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SSB Raising Day: सरहदों की चौकसी, मुल्क की हिफाज़त, ये सिर्फ ड्यूटी नहीं, एक अटूट संकल्प है। इसी संकल्प के 62 वर्ष पूरे होने पर, शौर्य और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला।

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SSB Raising Day: शौर्य की गाथा, सेवा का संकल्प और ग्रामीण युवाओं की जोश भरी दौड़

SSB Raising Day: 62 वर्ष की गौरवशाली यात्रा और सामुदायिक पहल

देश की सुरक्षा में अहर्निश लगे सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने हाल ही में अपना 62वां स्थापना दिवस भव्यता के साथ मनाया। इस अवसर पर बल ने न सिर्फ अपने शौर्य और बलिदान को याद किया, बल्कि सामुदायिक सहभागिता की मिसाल भी पेश की। एसएसबी का यह SSB Raising Day सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि देश सेवा के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक था, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान ग्रामीण युवाओं में युवा सहभागिता बढ़ाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का प्रयास भी स्पष्ट दिखा। बल के अधिकारियों ने इस गौरवपूर्ण अवसर पर अपने जवानों को संबोधित करते हुए उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ, एसएसबी स्थानीय आबादी के साथ मधुर संबंध स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दिवस सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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5 किलोमीटर की दौड़ में उमड़ा ग्रामीण जोश

स्थापना दिवस समारोह के मुख्य आकर्षणों में से एक 5 किलोमीटर की दौड़ प्रतियोगिता रही, जिसमें सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सुबह-सुबह ठंड के बावजूद, इन युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। इस दौड़ का उद्देश्य युवाओं को शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूक करना और उन्हें सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना था। यह पहल युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना को भी पुष्ट करती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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दौड़ के सफल आयोजन के बाद विजेताओं को एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण समारोह में स्थानीय गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे, जिन्होंने एसएसबी की इस पहल की सराहना की। इस तरह के आयोजनों से न केवल बल और आम जनता के बीच की दूरी कम होती है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर युवा सहभागिता को भी बल मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

एसएसबी के 62वें स्थापना दिवस का यह कार्यक्रम, बल के ‘सेवा, सुरक्षा, बंधुत्व’ के आदर्शों को साकार करता दिखा। यह एक बार फिर साबित हुआ कि एसएसबी सिर्फ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि एक ऐसा संगठन है जो समाज के कल्याण और राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। यह कार्यक्रम जवानों और नागरिकों, दोनों के लिए प्रेरणादायक रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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