अविश्वास प्रस्ताव: बेगूसराय की सियासत में आजकल खूब हलचल है. जिला परिषद अध्यक्ष सुरेंद्र पासवान के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। पटना हाईकोर्ट ने 19 मई को होने वाली विशेष बैठक पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे अध्यक्ष को बड़ी राहत मिली है।
बिहार के बेगूसराय जिले में जिला परिषद अध्यक्ष सुरेंद्र पासवान के खिलाफ 28 सदस्यों ने मिलकर अविश्वास प्रस्ताव लाया था. इन नाराज सदस्यों ने अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए थे और जिलाधिकारी (डीएम) तथा उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को संयुक्त रूप से आवेदन दिया था. इसी के बाद डीएम ने इस मामले को लेकर 19 मई को कलेक्ट्रेट भवन के कारगिल विजय सभागार में विशेष बैठक बुलाई थी, ताकि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
अविश्वास प्रस्ताव पर हाईकोर्ट में याचिका और सुनवाई
जिला परिषद अध्यक्ष सुरेंद्र पासवान ने इस अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. पटना हाईकोर्ट में CWJC NO – 6574/2026 मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ सारथी ने 15 मई 2026 को की. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 70(4)(i) का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है.
वकील ने अदालत को यह भी बताया कि अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव की प्रति सही ढंग से उपलब्ध नहीं कराई गई, जो कि कानून का उल्लंघन है. इसके बावजूद, जिलाधिकारी ने 19 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे बैठक तय कर दी थी. दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद, पटना हाईकोर्ट के जस्टिस ने अविश्वास प्रस्ताव पर 19 मई 2026 को होने वाली विशेष बैठक पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह फैसला अध्यक्ष सुरेंद्र पासवान के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
क्या है बिहार पंचायत राज अधिनियम?
बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006, पंचायत स्तर पर स्थानीय स्वशासन को नियंत्रित करता है. इसकी धारा 70(4)(i) अविश्वास प्रस्ताव लाने और उसकी प्रक्रिया से संबंधित है. इस मामले में, कोर्ट ने पाया कि इस धारा के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, जिससे अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बेगूसराय जिला परिषद में राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं. अब देखना यह होगा कि आगे क्या कानूनी और राजनीतिक कदम उठाए जाते हैं. यह अविश्वास प्रस्ताव फिलहाल स्थगित हो गया है, लेकिन मुद्दे की गंभीरता बनी हुई है.







