
Sanitation Workers Strike: शहर की धमनियां जाम हो गई हैं, सड़कें कूड़े से बजबजा रही हैं और व्यवस्था की सांसें अटकी पड़ी हैं। वजह? अपने हक़ के लिए सड़क पर उतरे वो हाथ, जो कल तक शहर को साफ़-सुथरा रखने का जिम्मा उठाते थे। अकबरनगर नगर पंचायत में सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण पिछले तीन दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य चौक-चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों तक गंदगी का अंबार लग गया है, जिससे आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
नगर पंचायत प्रशासन और सफाई एजेंसी के खिलाफ वेतन भुगतान में देरी को लेकर सफाईकर्मियों में भारी रोष है। जानकारी के अनुसार, आमतौर पर महीने की 15 तारीख तक वेतन मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसी के विरोध में सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके खाते में पिछले महीने का वेतन नहीं आ जाता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
आखिर क्यों हुई यह Sanitation Workers Strike?
इस हड़ताल की मुख्य वजह महीने का वेतन समय पर न मिलना है। सफाईकर्मियों ने बताया कि वे अपनी मेहनत की कमाई के लिए बार-बार चक्कर नहीं काट सकते। इस महीने वेतन भुगतान में हुई देरी के कारण उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। उनकी मांग है कि जब तक पिछला वेतन भुगतान नहीं होता, वे काम पर नहीं लौटेंगे। प्रशासन द्वारा की गई बातचीत की कोशिश भी अब तक विफल रही है, क्योंकि कर्मी पहले भुगतान की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
हड़ताल के कारण नगर पंचायत के सभी वार्डों में गंदगी फैल गई है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। स्थानीय निवासियों को कूड़े के ढेरों के पास से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या कह रहा है नगर पंचायत प्रशासन?
इस पूरे मामले पर जब नगर पंचायत की अध्यक्ष किरण देवी से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि वेतन भुगतान में देरी हुई है। उन्होंने बताया, “इस महीने मार्च क्लोजिंग की वजह से वेतन भुगतान में कुछ तकनीकी देरी हुई है, जिस कारण सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं।” उन्होंने आश्वासन दिया कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाएगा। प्रशासन सफाईकर्मियों के संपर्क में है और जल्द ही उनके वेतन का भुगतान कराकर सफाई व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के ये वादे कब हकीकत में बदलते हैं और अकबरनगर के निवासियों को इस गंदगी से कब निजात मिलती है।






