
Child Labour: समाज के माथे पर लगे किसी कलंक की तरह है बाल मजदूरी, जिसे धोने के लिए अब भागलपुर में प्रशासन ने कमर कस ली है। शुक्रवार को हुई एक दिवसीय कार्यशाला में इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ने की रणनीति तैयार की गई।
Child Labour: भागलपुर के उप श्रमायुक्त कार्यालय के सभागार में 13 मार्च 2026 को इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ‘बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025’ के तहत सभी संबंधित विभागों और हितधारकों को संवेदनशील बनाना और उनकी क्षमता का निर्माण करना था। इस बैठक में श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के उप श्रमायुक्त श्री सुधांशु कुमार, सहायक श्रमायुक्त श्री निखिल रंजन और श्रम अधीक्षक (अधिनियम) श्री कुमार नलिनीकांत प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, और समाज कल्याण विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने भी भाग लिया। इसके अलावा, बांका और भागलपुर के जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति के सभी सदस्य, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तथा गैर-सरकारी संगठन ‘मुक्ति निकेतन’ के प्रतिनिधि भी इस मंथन में शामिल हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Child Labour उन्मूलन के लिए विभागों को मिली नई जिम्मेदारी
कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद सहायक श्रमायुक्त, भागलपुर ने ‘राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025’ पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस कार्य योजना में हर विभाग की भूमिका और दायित्व स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं ताकि आपसी समन्वय से बाल श्रम को रोका जा सके। विभागों के प्रमुख दायित्व इस प्रकार हैं:
- श्रम संसाधन विभाग: नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए छापामार दल के माध्यम से बाल श्रमिकों को मुक्त कराना।
- समाज कल्याण विभाग: मिशन वात्सल्य और जेजे एक्ट के तहत बच्चों के लिए संस्थागत और गैर-संस्थागत सेवाओं की स्थापना करना।
- शिक्षा विभाग: हर बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करना, क्योंकि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।
- स्वास्थ्य विभाग: मुक्त कराए गए सभी बाल श्रमिकों की तत्काल और मुफ्त चिकित्सीय जांच सुनिश्चित करना।
- SC/ST कल्याण विभाग: संबंधित श्रेणी के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करना और उनके नामांकन में सहायता करना।
- अल्पसंख्यक कल्याण विभाग: अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना।
दोषी नियोक्ताओं पर होगी कड़ी कार्रवाई
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन अभियान के तहत दोषी पाए जाने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके विरुद्ध न केवल प्राथमिकी दर्ज होगी, बल्कि एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार ₹20,000 की राशि भी वसूली जाएगी। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 जैसे श्रम कानूनों के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मुक्त कराए गए बच्चों को तत्काल आर्थिक सहायता के रूप में ₹3,000 और मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹25,000 की राशि सावधि जमा के रूप में दी जाती है।
सभी विभागों के समन्वय पर दिया गया जोर
रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर जिला बाल श्रम की मध्यम घटना और बांका जिला उच्च घटना की श्रेणी में आता है, जो चिंता का विषय है। इस बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बाल श्रम के स्रोत, पारगमन और गंतव्य, तीनों स्तरों पर सभी विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। उपस्थित सभी प्रतिभागियों से उनके सुझाव भी लिए गए ताकि इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अंत में, धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, और सभी ने 2025 तक इस सामाजिक बुराई को खत्म करने का संकल्प लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

