Bhagalpur E-Toilet Scam: भागलपुर के करोड़ों के ई-टॉयलेट हुए कबाड़, रिशु श्री की कंपनी पर FIR, करोड़ों के ई-टॉयलेट आखिर कैसे हुए कबाड़? ई-टॉयलेट लाजपत पार्क, तिलकामांझी, कचहरी चौक, घंटाघर, कोतवाली चौक, आदमपुर चौक, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड सहित 12 अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए थे। इनमें ऑटोमैटिक दरवाजे, सेंसर आधारित फ्लशिंग सिस्टम और ऑटो क्लीनिंग तकनीक जैसी आधुनिक सुविधाओं का दावा किया गया था। इन ई-टॉयलेटों को कुछ ही समय में चालू होने के बाद खराब हो गए और वे कबाड़ में तब्दील हो गए। क्या है पूरा मामला। पढ़िए –
करोड़ों के ई-टॉयलेट अब कबाड़ में बदल चुके हैं?
मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले में फंसे रिशु श्री के खिलाफ जांच की आंच अब भागलपुर तक पहुंच गई है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत यहां करोड़ों रुपये के ई-टॉयलेट बनाए गए थे, जो अब कबाड़ में बदल चुके हैं। इस पूरे मामले में रिशु श्री की कंपनी पर बड़ा एक्शन लिया गया है। ईओयू सूत्रों का दावा है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्थापित अधिकांश ई-टॉयलेट शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद अनुपयोगी और जर्जर हो गए। इसके बावजूद परियोजना की अधिकांश राशि का भुगतान कंपनी को कर दिया गया। फिलहाल करीब 50 लाख रुपये का भुगतान लंबित है, जिसे रोक दिया गया है।
करोड़ों के ई-टॉयलेट -प्रत्येक टॉयलेट की लागत 13 लाख रुपये से अधिक?
रिशु श्री की कंपनी रिलायबल एंटरप्राइजेज-रिलायबल इंफ्रा सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड से 3.40 करोड़ रुपये का ठेका मिला था। इस ठेके के तहत 25 ई-टॉयलेट का निर्माण होना था, जिसमें प्रत्येक टॉयलेट की लागत 13 लाख रुपये से अधिक बताई गई थी।
करोड़ों के ई-टॉयलेट –रिलायबल कंपनी के साथ किया गया एकरारनामा भी रद्द?
यह परियोजना शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर आधुनिक शौचालय सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसके साथ ही रिलायबल कंपनी के साथ किया गया एकरारनामा भी रद्द कर दिया गया है। बकाया राशि जब्त किए जाने के बाद इसी वर्ष 9 फरवरी को इशाकचक थाने में रिलायबल इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर रिशु श्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच जारी है।
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करोड़ों के ई-टॉयलेट आखिर कैसे हुए कबाड़?
हालांकि, यह महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के सबसे असफल कार्यों में से एक साबित हुई। इन ई-टॉयलेटों को कुछ ही समय में चालू होने के बाद खराब हो गए और वे कबाड़ में तब्दील हो गए। इनका रखरखाव न होने के कारण शहरवासियों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका।
कंपनी पर दर्ज हुई FIR, नगर आयुक्त की भूमिका भी सवालों में
स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों ने कई बार कंपनी से पत्राचार किया, लेकिन कबाड़ बन चुके इन ई-टॉयलेट का रखरखाव नहीं किया गया। इसके बाद लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में से लंबित 50 लाख रुपये का भुगतान जब्त कर लिया गया। स्मार्ट सिटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के आदेश पर यह कार्रवाई की गई।ईओयू की जांच में सामने आया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 25 यूनिट ई-टॉयलेट के निर्माण का ठेका रिशु श्री की कंपनी रिलायबल इंटरप्राइजेज- रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से करीब 3.40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इस हिसाब से एक ई-टॉयलेट की लागत 13 लाख रुपये से अधिक बैठती है।
राशि जब्त करने के साथ ही रिशु श्री की कंपनी का एकरारनामा भी रद्द कर दिया गया। इसी कड़ी में, इस साल 9 फरवरी को इशाकचक थाने में रिलायबल एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर रिशु श्री पर एक प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। यह मामला रिशु श्री के मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले के व्यापक जाल का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी जांच की आंच अब भागलपुर तक पहुंच गई है। जिस समय यह कार्य हुआ था, उस वक्त डॉ. योगेश सागर नगर निगम के नगर आयुक्त थे। उनकी भूमिका की विस्तृत जांच से बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि निर्माण के कुछ ही समय बाद अधिकांश ई-टॉयलेट जर्जर और अनुपयोगी हो गए। इसके बावजूद परियोजना की अधिकांश राशि का भुगतान कंपनी को कर दिया गया। सूत्रों का दावा है कि रिशु श्री ने स्थानीय अधिकारियों से अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए भुगतान प्रक्रिया को भी प्रभावित किया।
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भागलपुर स्मार्ट सिटी की इस परियोजना का उद्देश्य शहर के लोगों और बाहर से आने वाले यात्रियों को स्वच्छ और आधुनिक शौचालय सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, यह योजना अपने मकसद में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई और करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए। अब देखना यह है कि इस पूरे घोटाले में आगे क्या कार्रवाई होती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







